नयी दिल्ली, देश में चार नयी श्रम संहिताओं के लागू होने से कार्यबल को मजबूत संरक्षण नियमों के सरल अनुपालन और कामकाज की बेहतर स्थितियां मिलने की उम्मीद है।
एक सर्वेक्षण के अनुसार करीब 60 प्रतिशत श्रमिकों का मानना है कि इन नयी संहिताओं के लागू होने से उनकी कार्य स्थितियों में समग्र सुधार होगा।
श्रम मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में नोएडा स्थित वी वी गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान (वीवीजीएनएलआई) के सर्वेक्षण के हवाले से यह जानकारी दी गई।
यह संस्थान श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है।
केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष 21 नवंबर को चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया था और 31 दिसंबर 2025 को नियमों के मसौदे पर सुझाव मांगे थे। सरकार का इरादा एक अप्रैल 2026 से इन चारों संहिताओं को पूरी तरह प्रभावी बनाने का है।
मंत्रालय के अनुसार ‘श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन: धारणा आधारित विश्लेषण’ शीर्षक वाले इस अध्ययन से पता चलता है कि इन सुधारों को लेकर श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच विश्वास और सकारात्मकता बढ़ी है।
सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्षों के अनुसार 63 प्रतिशत श्रमिकों को काम के घंटों के बेहतर नियमन और 60 प्रतिशत को अवकाश के प्रावधानों में सुधार की उम्मीद है। करीब 66 प्रतिशत श्रमिकों का मानना है कि सुरक्षा और परिवहन से जुड़ी अनिवार्यताओं से महिला कर्मचारियों को बेहतर संरक्षण मिलेगा।
आय सुरक्षा के मोर्चे पर 64 प्रतिशत श्रमिकों को वेतन में पारदर्शिता और 54 प्रतिशत को समय पर भुगतान की उम्मीद है। सामाजिक सुरक्षा के संबंध में 68 प्रतिशत श्रमिकों ने ई-श्रम और कल्याण बोर्ड के माध्यम से सुविधाओं तक आसान पहुंच की सराहना की है। साथ ही 63 प्रतिशत श्रमिकों का मानना है कि नयी संहिताओं से अनुबंध प्रवासी और गिग या अस्थायी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाना और भी आसान हो जाएगा।
वहीं 76 प्रतिशत नियोक्ताओं ने कार्यबल के लचीलेपन को कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माना है।
नियोक्ताओं के दृष्टिकोण से करीब 64 प्रतिशत का मानना है कि निश्चित अवधि का रोजगार उनके कारोबारी मॉडल के लिए उपयुक्त है। इसके साथ ही 64 प्रतिशत नियोक्ताओं को उम्मीद है कि वेतन भुगतान के समयबद्ध नियम कार्यस्थल पर अनुशासन को बढ़ावा देंगे।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common