वाशिंगटन, ज्यादा तनाव की वजह से कई तरह के संक्रमण खास कर कोविड-19 से लड़ने में शरीर की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है और मृत्यु की आशंका भी बढ़ जाती है। चूहों पर किए गए एक अध्ययन में यह परिणाम सामने आया है।
शोध पत्रिका ‘नेचर’ में सोमवार को प्रकाशित अध्ययन में यह दिखाया गया है कि ज्यादा तनाव के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण या इन्फ्लूएंजा के दौरान मष्तिष्क का कौन सा हिस्सा शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को नियंत्रित करता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादा तनाव की वजह से पारावेट्रीकुलर हाइपोथैलामस नामक क्षेत्र के न्यूरॉन तुरंत हरकत में आते हैं और श्वेत रक्त कोशिकाएं या ल्यूकोसाइट्स का लिम्फ नोड्स से रक्त और अस्थि मज्जा तक प्रवाह बढ़ जाता है। इसके घटने से कोविड संक्रमण और इन्फ्लूएंजा की स्थिति में शरीर संक्रमण से लड़ने में कमजोर हो जाता है तथा जटिलताएं और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
आईकन स्कूल ऑफ मेडिसिन, माउंट सिनाई, अमेरिका के फिलिप के स्विरस्की ने कहा, ‘‘इस शोध कार्य से हमें पता चला कि तनाव का हमारे प्रतिरक्षा तंत्र और संक्रमण से लड़ने की हमारी क्षमता पर बड़ा असर पड़ता है।’’ स्विरस्की ने एक बयान में कहा, ‘‘यह दिखाता है कि किस तरह सामाजिक आर्थिक कारक, जीवन शैली और वातावरण नियंत्रित करें ताकि हमारा शरीर संक्रमण के खिलाफ बचाव कर पाए।’’
मस्तिष्क को प्रतिरक्षा प्रणाली से जोड़ने वाली खोज इस बात की बेहतर समझ प्रदान करती है कि तनाव वायरस के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को कैसे प्रभावित करता है और क्यों कुछ लोग गंभीर बीमारी और बदतर परिणामों के लिए अतिसंवेदनशील हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने शांतचित्त और तनाव के शिकार कुछ चूहों पर अध्ययन किया और उनके प्रतिरक्षा तंत्र का विश्लेषण किया। अध्ययन के दौरान देखा गया कि तनाव के शिकार चूहों की प्रतिरक्षा में बड़ा बदलाव आया। शोधकर्ता यह देखना चाहते थे कि तनाव के दौरान शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक प्रतिरक्षा कोशिकाओं का प्रवाह किस तरह होता है।
कोविड, इन्फ्लूएंजा से संक्रमित चूहों पर भी इसका अध्ययन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि संक्रमित चूहे कमजोर हो गए और उनकी प्रतिरक्षा भी घट गई तथा मृत्यु का खतरा बढ़ गया।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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