ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर नए कानून के तहत कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट दी

वाशिंगटन,  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए रूस से सबसे अधिक तेल या गैस खरीदने वाले पांच देशों से आयातित वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने और मॉस्को को निशाना बनाने वाले एक नए कानून के तहत कुछ प्रतिबंधों के प्रावधानों में छूट दे दी है।

           ट्रंप ने शुक्रवार रात हस्ताक्षरित एक शासकीय आदेश में ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ के तहत निर्धारित प्रतिबंधों  पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट दे दी। यह कदम रूस के साथ अमेरिका और वैश्विक बाजारों के लिए डीजल की आपूर्ति के संबंध में समझौता होने के कुछ दिन बाद उठाया गया है।

           ट्रंप ने कहा  “मैं ग्राहम अधिनियम में निर्धारित प्रतिबंधों  पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट देता हूं।”ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस को एक प्रमाणपत्र सौंपा है  जिसमें बताया गया है कि इस समय यह छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। अमेरिकी सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस कदम की आलोचना की।

           उन्होंने कहा  “इन छूटों का हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है  बल्कि इनका मकसद व्लादिमीर पुतिन को खुश करना है। मुझे उम्मीद है कि मेरे रिपब्लिकन सहयोगी इस शर्मनाक और कायरतापूर्ण कदम की निंदा करेंगे।” ‘ग्राहम अधिनियम’ के तहत ट्रंप को मॉस्को पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों से अमेरिका में आयात होने वाली वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया था। इन देशों में चीन और भारत भी शामिल हैं।

           अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को इस अधिनियम को पारित किया था और ट्रंप ने दो दिन बाद इस पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के तहत उन्हें रूस से कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले पांच सबसे बड़े देशों से आने वाली वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिला था।

           शासकीय आदेश के तहत कानून की धारा 112 और 113 या इस आदेश में निर्धारित शुल्कों को लागू करने से छूट दी गई है। इस छूट में रूस के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों को निशाना बनाकर लगाए जाने वाले नए शुल्क शामिल हैं। इसके अलावा  रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर लगाए जाने वाले संबंधित शुल्कों में भी छूट दी गई है। हालांकि  इससे उन देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर लागू होने वाले अमेरिका के अन्य शुल्कों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

           ट्रंप ने कहा  “ग्राहम अधिनियम की धारा 115(ए) के तहत मैं अधिनियम की धारा 112 और 113 या इस आदेश में निर्धारित किसी भी शुल्क को लागू करने से छूट देता हूं।”

           इस अधिनियम की धारा 115 राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में प्रतिबंधों  पाबंदियों और शुल्कों को हटाने की अनुमति देती है  बशर्ते वे कांग्रेस को एक लिखित प्रमाण-पत्र और इस निर्णय के आधार को स्पष्ट करने वाली एक रिपोर्ट सौंपें। कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि ट्रंप ने ये दोनों दस्तावेज़ सौंप दिए हैं।

           वहीं ग्राहम एक्ट की धारा 113 उन देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने से संबंधित है  जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं  या प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।

           इस शासकीय आदेश में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को यह निर्देश भी दिया गया है कि वे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परामर्श करके  विभिन्न देशों द्वारा रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद  तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली गतिविधियों पर नज़र रखें।

           अधिकारियों को ऐसे हालात के बारे में राष्ट्रपति को सूचित करने को कहा गया है  जिनसे आगे की कार्रवाई की जरूरत का संकेत मिलता हो। इसमें दी गई छूटों से संबंधित संभावित कार्रवाई भी शामिल है।

           यह आदेश ऐसे समय आया है जब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर हैं।

           विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर रुबियो के साथ मुलाकात के दौरान ग्राहम अधिनियम को लेकर चिंताएं जताई थीं।

           समझा जाता है कि जयशंकर ने रुबियो को बताया था कि भारत की तेल रिफाइनरी मुख्य रूप से मध्यम श्रेणी के सल्फरयुक्त कच्चे तेल के प्रसंस्करण के लिए तैयार की गई हैं जिसकी आपूर्ति पश्चिम एशिया के देशों और रूस से होती है।

           उन्होंने रुबियो को यह भी बताया था कि वेनेजुएला से भारी ग्रेड का कच्चा तेल मिलता है जबकि अमेरिका से हल्के ग्रेड का कच्चा तेल आता है  जिसे भारतीय रिफाइनरियों द्वारा उपयोग किए जाने से पहले मिश्रण की आवश्यकता होगी।ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया के देशों से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है। क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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