ठाणे, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना ने ‘दशकों’ तक बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में शासन किया और अब उसी नगर निकाय में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन की योजना बनाई है। शिंदे ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि जब बीएमसी पर शिवसेना (यूबीटी) का नियंत्रण था तब उसने ‘भ्रष्टाचार की सभी सीमाएं लांघ’ दी थी।
गौरतलब है कि शिंदे एकीकृत शिवसेना के वरिष्ठ नेता थे और पूर्ववर्ती महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार में कैबिनेट मंत्री थे लेकिन एक साल पहले उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। शिंदे ने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) ने दो दशक से अधिक समय तक मुंबई के लोगों को लूटा और मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उसने कोविड-19 के पीड़ितों को भी नहीं छोड़ा।
शिंदे ने कहा, ‘‘अब वे ही लोग कल नगर निकाय के मुख्यालय के सामने मोर्चा (विरोध प्रदर्शन) निकालने की योजना बना रहे हैं। यह ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ जैसा है।
उन्होंने दावा किया कि कोविड-19 पीड़ितों के शवों को रखने के लिए मुंबई में पांच हजार रूपये प्रति बैग की दर से बैग खरीदे गए जबकि पुणे में 300 रुपये प्रति बैग की दर से इन्हें खरीदा गया । उन्होंने कहा, ‘‘राज्य की जनता नंवबर 2019 में (विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद)यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिवसेना की सरकार चाहती थी और हमारे 50 विधायकों ने पिछले साल फैसला लिया जिसका देवेंद्र फडणवीस नीत भाजपा ने समर्थन किया। राज्य की जनता हमसे खुश है।’’
शिंदे ने कहा कि उद्धव नीत सरकार ने कई अवसरंचना एवं विकास योजनाओं को रोक दिया था लेकिन हमारी सरकार आने के बाद ‘‘दोहरी गति’’से राज्य के विकास के लिए कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब राज्य और केंद्र सरकार समान विचार वाली होती हैं तो विकास दोहरी गति से होता है। यही कारण है कि मराठवाड़ा जल ग्रिड परियोजना को जल्द केंद्र से मंजूरी मिलेगी।’’गौरतलब है कि देश का सबसे अमीर नगर निगम बीएससी लंबे समय से चुनाव लंबित होने की वजह से इस समय प्रशासक के नियंत्रण में है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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