डीआरडीओ ने बारूदी सुरंग निरोधक अभियानों के लिए नई पीढ़ी के मानव-पोर्टेबल स्वायत्त जल-अंडर-व्हीकल विकसित किए

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल), विशाखापत्तनम द्वारा बारूदी सुरंग निरोधक अभियानों के लिए नई पीढ़ी के मानव-पोर्टेबल स्वायत्त जल-अंडर-व्हीकल (एमपी-एयूवी) का सफलतापूर्वक विकास किया गया है।

इस प्रणाली में बारूदी सुरंग जैसी वस्तुओं का वास्तविक समय में पता लगाने और वर्गीकरण के लिए प्राथमिक पेलोड के रूप में साइड स्कैन सोनार और जल-अंडर-व्हीकल कैमरों से लैस कई एयूवी शामिल हैं। ऑनबोर्ड डीप लर्निंग-आधारित लक्ष्य पहचान एल्गोरिदम स्वायत्त वर्गीकरण को सक्षम बनाते हैं, जिससे ऑपरेटर का कार्यभार और मिशन का समय काफी कम हो जाता है।

इसके अतिरिक्त, परिचालन के दौरान अंतर-एयूवी डेटा विनिमय को सुगम बनाने के लिए एक मजबूत अंतर्जलीय ध्वनिक संचार को एकीकृत किया गया है, जिससे स्थितिजन्य जागरूकता में वृद्धि सुनिश्चित होती है।एनएसटीएल/हार्बर में हाल ही में संपन्न हुए क्षेत्र परीक्षणों ने प्रमुख प्रणाली मापदंडों और महत्वपूर्ण मिशन उद्देश्यों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया है। इस प्रणाली के निर्माण में कई उद्योग भागीदार शामिल हैं और यह प्रणाली अगले कुछ महीनों में उत्पादन के लिए तैयार हो जाएगी।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने एमपी-एयूवी के सफल विकास के लिए एनएसटीएल टीम की सराहना की है और इसे तैनाती योग्य, बुद्धिमान और नेटवर्कयुक्त माइन काउंटरमेजर समाधान की दिशा में एक प्रमुख मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि यह नौसैनिक माइन युद्ध अनुप्रयोगों के लिए कम परिचालन जोखिम और लॉजिस्टिक फुटप्रिंट के साथ त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता प्रदान करता है।https://x.com/SpokespersonMoD/status/1989333886820909443/photo/1

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