भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अकरा की अपनी यात्रा के दौरान घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा और विदेश मंत्री सैमुअल ओकुद्ज़ेटो अबलाकवा से मुलाक़ात की। उन्होंने व्यापार, निवेश, विकास, रक्षा, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भारत-घाना व्यापक साझेदारी को और मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा की।राष्ट्रपति महामा के साथ अपनी मुलाक़ात के दौरान, जयशंकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएँ दीं। चर्चा का मुख्य विषय पिछले साल मोदी की घाना की ऐतिहासिक यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों में आई मज़बूती थी। जयशंकर ने घाना के विकास के लिए महामा के विज़न और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी का विस्तार करने के उनके सकारात्मक नज़रिए की सराहना की।
अकरा पहुँचने पर अबलाकवा ने जयशंकर का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्होंने घाना के विदेश मंत्री के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की। दोनों मंत्रियों ने व्यापार, निवेश, विकास, फ़ार्मास्यूटिकल्स, क्षमता निर्माण, रक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान में सहयोग पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के साझेदार के तौर पर भारत और घाना की विकास की आकांक्षाएँ और ऐतिहासिक एकजुटता एक जैसी है।उनकी बातचीत में बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और अफ़्रीकी यूनियन तथा वेस्ट अफ़्रीकन स्टेट्स के आर्थिक समुदाय (ECOWAS) के साथ भारत के जुड़ाव को मज़बूत करने पर भी चर्चा हुई।दोनों मंत्रियों की मौजूदगी में ‘साउथ-साउथ सहयोग’ को मज़बूत करने के मकसद से दो समझौतों (MoU) का आदान-प्रदान हुआ।
ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ घाना के बीच हुए एक समझौते में एकेडमिक्स, वैज्ञानिक रिसर्च और क्षमता निर्माण में सहयोग की व्यवस्था की गई है। एक और समझौता इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च के बीच हुआ,नई दिल्ली और घाना की ‘काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च–क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के बीच कृषि अनुसंधान और शिक्षा में सहयोग पर समझौता हुआ है।जयशंकर ने अबलाकवा और घाना के शिक्षा मंत्री हारुना इड्रिसु के साथ मिलकर फ्रैंगीपानी (या प्लुमेरिया) का पौधा भी लगाया।
यह गतिविधि भारत के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान और घाना की ‘ट्री फॉर लाइफ’ पहल को सम्मान देने के लिए थी, जो दोनों देशों की टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।घाना के फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट में भारत, अफ्रीका और ग्लोबल साउथ पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि मुश्किल समय में कूटनीति को प्रतिस्पर्धा को टकराव में बदले बिना उसे संभालना चाहिए और हितों के अलग होने पर भी सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।उन्होंने अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, डिजिटल सेवाओं, विनिर्माण और उद्यमिता के क्षेत्रों में भारत के बदलाव का जिक्र करते हुए देश को वैश्विक विकास का एक अहम इंजन बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का सीधा संबंध मजबूत सप्लाई चेन, तकनीकी क्षमताओं और जरूरी सामान बनाने की क्षमता से है।
उन्होंने कहा कि भारत अहम क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को महत्व देता है और साथ ही दूसरे क्षेत्रों में सहयोग को भी बढ़ावा देता है।मौके बढ़ाने में सुलभ डिजिटल इकोसिस्टम की भूमिका पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अफ्रीकी साझेदारों के साथ अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।
उन्होंने भारत और अफ्रीका की युवा आबादी को उत्पादक, कुशल और सशक्त नागरिकों में बदलने के महत्व पर भी जोर दिया।जयशंकर ने भारत की बढ़ती वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को दूरदर्शिता, प्रतिबद्धता और किफायती होने का सबूत बताया और साथ ही तकनीक के फायदों को व्यापक रूप से साझा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त की निरंतर आपूर्ति के महत्व के साथ-साथ ग्लोबल साउथ के औद्योगीकरण के अधिकार को भी रेखांकित किया।
विदेश नीति पर उन्होंने कहा कि भारत का नजरिया रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित है और साझेदारियों से देश के विकल्प बढ़ने चाहिए, न कि सीमित होने चाहिए। उन्होंने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और भारत की अध्यक्षता के दौरान G20 में अफ्रीकी संघ को शामिल किए जाने का उदाहरण दिया।जयशंकर ने एक ऐसी सुधरी हुई वैश्विक व्यवस्था की मांग की जो अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के विकास, प्रगति और समृद्धि का समर्थन करे।
उन्होंने व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षमता विकास, मानवीय सहायता और आपदा राहत, कृषि, स्वास्थ्य और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ज़्यादा क्षमताओं वाला भारत एक ज़्यादा असरदार साझेदार होगा, और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सहयोग को मज़बूत करेगा।अपनी यात्रा के दौरान, जयशंकर ने अकरा में भारतीय समुदाय के सदस्यों और भारत के दोस्तों से भी बातचीत की। उन्होंने घाना में एक दोस्त और भरोसेमंद व असरदार साझेदार के तौर पर भारत की स्थिति के बारे में बात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को मज़बूत करने में समुदाय के योगदान की तारीफ़ की।https://x.com/DrSJaishankar/status/2107525191576191274/photo/2