तेलंगाना में 2024-26 के दौरान 820 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण : डीजीपी

हैदराबाद,  तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सी वी आनंद ने सोमवार को राज्य में माओवादी गतिविधियों की स्थिति की समीक्षा की और सुरक्षा संबंधी चिंताओं से निपटने के लिए विशेष खुफिया शाखा (एसआईबी) द्वारा चलाए जा रहे उग्रवाद-रोधी अभियानों तथा खुफिया उपायों का आकलन किया।

             एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार  एसआईबी के दौरे के दौरान डीजीपी ने वामपंथी उग्रवाद का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के भूमिगत कैडरों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण सुनिश्चित कराने में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के निरंतर प्रयासों की सराहना की।

             विज्ञप्ति में कहा गया कि वर्ष 2024 से 2026 तक कुल 820 माओवादियों ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया  जिनमें माओवादियों की केंद्रीय समिति के चार और राज्य समिति के 22 सदस्य शामिल हैं।

             इन आत्मसमर्पणों के दौरान भाकपा (माओवादी) कैडरों ने 334 आग्नेयास्त्र भी जमा कराए  जिनमें 58 एके-47 राइफल  48 इंसास राइफल  50 एसएलआर  छह एलएमजी तथा अन्य अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं।

             डीजीपी ने खुफिया आधारित अभियानों  विश्वास बहाली उपायों और पुनर्वास पहलों के माध्यम से तेलंगाना में सशस्त्र माओवादी आंदोलन को कमजोर करने में एसआईबी के उल्लेखनीय योगदान की सराहना भी की।

             उन्होंने विशेष रूप से भूमिगत माओवादी कैडरों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में एसआईबी की सक्रिय भूमिका की प्रशंसा की।

             डीजीपी आनंद ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास और समाज में उनके पुनर्समावेशन के लिए किए जा रहे उपायों की भी समीक्षा की और आश्वासन दिया कि तेलंगाना पुलिस उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराती रहेगी।

             उन्होंने कहा कि एसआईबी को आत्मसमर्पण कर चुके कैडरों पर करीबी नजर रखनी चाहिए तथा उनके कौशल विकास  रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण  नौकरी उपलब्ध कराने  पुनर्वास और समाज में पुनर्समावेशन को सुनिश्चित करना चाहिए।

             डीजीपी ने अधिकारियों को बदलते सुरक्षा परिदृश्य के प्रति सचेत करते हुए कहा कि चार दशक बाद माओवाद के कमजोर पड़ने के साथ एसआईबी को उभरती चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढालना होगा।

             उन्होंने कहा  “एसआईबी को पुलिस खुफिया तंत्र में व्यापक भूमिका निभानी चाहिए  उभरते रुझानों  सोशल मीडिया और उससे उत्पन्न सामाजिक परिवर्तनों का अध्ययन करना चाहिए  जो विशेष रूप से युवाओं के बीच कानून-व्यवस्था और शांति को प्रभावित कर रहे हैं  ताकि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।”

             विज्ञप्ति में कहा गया कि इस दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (खुफिया) विजय कुमार और पुलिस महानिरीक्षक (खुफिया एवं एसआईबी) कार्तिकेय भी मौजूद थे। क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

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