दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की आबकारी रिपोर्ट (2017-18 से 2020-21 तक की चार साल की अवधि के लिए) विधानसभा के पटल पर पेश की।
इस रिपोर्ट में दिल्ली में भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) और विदेशी शराब के विनियमन और आपूर्ति की जांच करने के लिए 2017-18 से 2021-22 तक की चार साल की अवधि को कवर करते हुए “दिल्ली में शराब के विनियमन और आपूर्ति” पर किए गए प्रदर्शन ऑडिट के परिणाम शामिल हैं। 2017-21 की अवधि के लिए ऑडिट निष्कर्षों में लाइसेंस प्रदान करने में उल्लंघन, आईएमएफएल के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी, शराब की गुणवत्ता पर अपर्याप्त नियंत्रण, राजस्व रिसाव की समय पर पहचान और उसे रोकने और शराब की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में कमजोर नियामक कार्यप्रणाली, दिल्ली आबकारी अधिनियम/नियमों के उल्लंघन के मामलों में साक्ष्य संग्रह और पुष्टि में कठोरता की कमी आदि शामिल हैं।
यह रिपोर्ट नई आबकारी नीति (2021-22) में कमियों को भी सामने लाती है जैसे कि नई आबकारी नीति के गठन के लिए बदलावों का सुझाव देने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की अनदेखी करना जैसे कि राज्य के स्वामित्व वाली थोक इकाई के बजाय निजी संस्थाओं को थोक लाइसेंस प्रदान करना, प्रति बोतल वसूले जाने वाले उत्पाद शुल्क के स्थान पर लाइसेंस शुल्क में उत्पाद शुल्क का अग्रिम प्रभारण और आवेदक को अधिकतम दो दुकानें आवंटित किए जाने के स्थान पर अधिकतम 54 खुदरा दुकानें प्राप्त करने की अनुमति देना ऑडिट निष्कर्षों का कुल वित्तीय निहितार्थ लगभग ₹ 2,026.91 करोड़ है।