दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रस्तावित ‘दिल्ली ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस बिल, 2026’ की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में बिज़नेस कामकाज को आसान बनाने और राष्ट्रीय राजधानी में व्यापार और उद्योग के लिए एक पारदर्शी व निवेश-अनुकूल माहौल बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य फोकस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कम से कम सरकार, ज़्यादा से ज़्यादा गवर्नेंस” (Minimum Government, Maximum Governance) के विज़न के अनुरूप सुधारों को लागू करने पर था।
प्रस्तावित कानून के अनुसार, व्यवसायों के लिए ज़्यादातर सरकारी सेवाओं को एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ के ज़रिए जोड़ा जाएगा, जिससे उद्यमी एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर कई तरह की मंज़ूरी और सेवाएँ पा सकेंगे। इस बिल में कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए नियमों का पालन आसान बनाने के लिए ‘सेल्फ़- सर्टिफ़िकेशन’ (खुद से सर्टिफ़िकेट देना), तय समय में आवेदन पर फ़ैसला न होने पर ‘डीम्ड अप्रूवल’ (अपने आप मंज़ूरी मिलना), नए उद्यमों के लिए शुरुआती तीन साल तक नियमित निरीक्षण से छूट, और पूरी मंज़ूरी प्रक्रिया के लिए ‘दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन’ (DSIIDC) को सिंगल नोडल एजेंसी बनाने का प्रस्ताव भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रस्तावित सुधारों का मकसद यह पक्का करना है कि व्यापारी, दुकानदार और उद्यमी सरकारी प्रक्रियाओं में उलझने के बजाय अपना समय कारोबार बढ़ाने में लगाएँ। उन्होंने कहा कि इस पहल से दिल्ली में ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (कारोबार करने में आसानी) बेहतर होने, नया निवेश आने, नए उद्योगों को बढ़ावा मिलने और शहर के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।https://x.com/bjpravinder16/status/2084996723429302287/photo/1