पाँच दशकों के अंतराल के बाद, दिल्ली को एक नया ड्रेनेज मास्टर प्लान मिला है, जिसका उद्देश्य राजधानी की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान प्रदान करना और सीवर व जल निकासी प्रणालियों का आधुनिकीकरण करना है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर चल रहे सेवा पखवाड़ा के दौरान एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में इस योजना का अनावरण किया गया।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय आवास, शहरी मामलों और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी उपस्थित थीं।30 साल के विज़न के साथ तैयार की गई यह योजना लगभग आधी सदी बाद आई है, जब आखिरी ऐसी योजना 1976 में बनाई गई थी, जब दिल्ली की आबादी केवल 60 लाख थी। अब जब आबादी 2 करोड़ को छू रही है और शहरीकरण तेज़ी से हो रहा है, तो नए ब्लूप्रिंट को शहर की सबसे ज़रूरी ज़रूरत बताया गया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस साल के मानसून ने पहले ही अच्छे परिणाम दिखाए हैं, और लंबे समय से बाढ़ की चपेट में रहने वाले इलाकों में जलभराव नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “यह तो बस शुरुआत है। भविष्य में दिल्ली पूरी तरह जलभराव से मुक्त हो जाएगी।”नए ड्रेनेज मास्टर प्लान की मुख्य विशेषताएँ:
• अगले 30 वर्षों तक दिल्ली को शहरी बाढ़ और जलभराव से बचाना।
• वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए शहर को तीन प्रमुख घाटियों – नजफगढ़, बारापुला और ट्रांस-यमुना – में विभाजित किया गया है।
• अनुमानित लागत ₹57,000 करोड़, चरणों में कार्यान्वित।• मानसून के दौरान 70 मिमी प्रति घंटे तक की वर्षा को झेलने की क्षमता।
• न केवल बाढ़ सुरक्षा, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता, जन स्वास्थ्य और आर्थिक बचत भी सुनिश्चित करता है।अनावरण समारोह में सांसद मनोज तिवारी, नेता योगेंद्र चंदोलिया और बांसुरी स्वराज, दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और रविंदर इंद्राज सिंह, कई विधायकों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।https://x.com/p_sahibsingh/status/1969012283310481642/photo/3