दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण की समस्या को खत्म करने के लिए मास्टर प्लान ला रही है। इस योजना में प्रदूषण के तीन प्रमुख स्रोतों- धूल प्रदूषण, वाहन प्रदूषण और निर्माण संबंधी प्रदूषण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं: • दिल्ली सरकार 2026 तक 11 हजार बसें सड़कों पर उतारेगी, जिनमें करीब 8000 ई-बसें शामिल होंगी।
• राजधानी में पुराने वाहनों का पता लगाने के लिए 500 पेट्रोल पंपों पर ‘इंपल्स सिस्टम’ लगाया जा रहा है, जिससे पुराने वाहनों की पहचान होगी और राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण में काफी कमी आएगी।
• बड़े होटल, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, एयरपोर्ट, कंस्ट्रक्शन साइट्स… सभी को एंटी-स्मॉग गन लगाना होगा • दिल्ली की ऊंची इमारतें, होटल, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, मॉल… सभी के लिए स्मॉग गन जरूरी • क्लाउड सीडिंग की व्यवहार्यता का गहन अध्ययन किया जाएगा ताकि केंद्र सरकार के अधिकारियों से सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की जा सकें, • दिल्ली सरकार दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और दिल्ली सरकार के स्कूलों के इको क्लब के सदस्यों को शामिल करेगी ताकि वे अपने परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों के बारे में संदेश फैला सकें• दिल्ली में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए खाली जमीनों पर जंगल बनाए जाएंगे : रिपोर्टरों से बात करते हुए सिरसा ने कहा: “31 मार्च के बाद 15 साल से पुराने वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा।
दिल्ली में कुछ बड़े होटल हैं, कुछ बड़े ऑफिस कॉम्प्लेक्स हैं, दिल्ली एयरपोर्ट है, बड़ी कंस्ट्रक्शन साइट्स हैं, हम वहां यह अनिवार्य करने जा रहे हैं कि वे तुरंत एंटी-स्मॉग गन लगाएं ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। हम दिल्ली की सभी ऊंची इमारतों में स्मॉग गन लगाना अनिवार्य करने जा रहे हैं। हम दिल्ली के सभी होटलों में स्मॉग गन लगाना अनिवार्य करने जा रहे हैं। इसी तरह, हम सभी व्यावसायिक परिसरों में भी इसे अनिवार्य करने जा रहे हैं। हमने आज फैसला किया है कि क्लाउड सीडिंग के लिए जो भी अनुमति चाहिए, हम उसे लेंगे और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जब दिल्ली में गंभीर प्रदूषण हो, तो क्लाउड सीडिंग के जरिए बारिश कराई जा सके और प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। https://en.wikipedia.org/wiki/Manjinder_Singh_Sirsa#/media/File:Manjinder_Singh_S