दिल्ली सरकार ने सर्दियों में होने वाले प्रदूषण से निपटने की तैयारी को मज़बूत करने और नागरिकों, उद्योगों, संस्थानों, कमर्शियल प्रतिष्ठानों और निर्माण एजेंसियों को नवंबर से पहले प्रदूषण-नियंत्रण उपायों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय देने के लिए जून में ‘सर्दियों में हवा की गुणवत्ता के प्रबंधन के लिए प्रोएक्टिव फ्रेमवर्क’ की घोषणा की है।
इस फ्रेमवर्क के तहत, जो ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (GRAP) के साथ-साथ काम करेगा, हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक कई तरह के एहतियाती उपाय लागू रहेंगे।मुख्य प्रावधानों में शामिल हैं: केवल वैध ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट’ (PUCC) वाले वाहनों को ही ईंधन भरने की अनुमति देना; 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड नॉन-BS VI कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाना; और 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना करना।इस फ्रेमवर्क में ज़रूरत पड़ने पर सरकारी और निजी कार्यालयों में काम के समय में बदलाव और 50 प्रतिशत तक कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति (फिजिकल अटेंडेंस) की व्यवस्था का भी प्रावधान है।
निर्माण और तोड़-फोड़ वाली जगहों पर धूल-नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा, जबकि प्रदूषण के चरम समय के दौरान निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।बड़ी निर्माण साइटों और इमारतों के लिए एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सप्रेशन सिस्टम लगाना ज़रूरी होगा।
सरकार फील्ड निरीक्षण और ड्रोन निगरानी के ज़रिए खुले में कचरा जलाने की घटनाओं की निगरानी भी बढ़ाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।दिल्ली सरकार ने कहा कि इस फ्रेमवर्क का मकसद सर्दियों में प्रदूषण के मौसम के दौरान समय पर तैयारी सुनिश्चित करना और जनता को होने वाली असुविधा को कम करना है।https://en.wikipedia.org/wiki/Non_Polluting_Vehicle_mark#/media/File:NonPollutingVehicleMarkIndia.jpg