चेन्नई, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने भाषा संबंधी पहचान के प्रति तमिलनाडु की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए द्वि-भाषा नीति को सोमवार को द्रविड़ आंदोलन की एक बुनियादी उपलब्धि करार दिया। यहां एक विवाह समारोह में स्टालिन ने राज्य के भाषाई रुख के पीछे के ऐतिहासिक जनादेश को रेखांकित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत सी. एन. अन्नादुरई की विरासत का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यह नीति त्रि-भाषा नीति के थोपे जाने का विरोध करते हुए तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता देने के लिए लागू की गई थी। द्रमुक पदाधिकारियों के ‘आत्मसम्मान विवाह’ (सेल्फ-रेसपेक्ट वैडिंग) समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा ‘‘जब अन्ना ने 1967 में पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला और विधानसभा में प्रवेश किया तो उन्होंने हमारे तमिलनाडु के लिए तीन मोती जैसी योजनाओं को पूरा किया। पहली दो-भाषा नीति दूसरी राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु करना और तीसरी आत्मसम्मान विवाहों को वैध घोषित करने वाला कानून बनाना।’’
स्टालिन ने कहा कि ऐसे विवाह जिनमें पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के बजाय ‘तिरुक्कुरल’ के सिद्धांतों के तहत रिश्तेदारों और मित्रों की उपस्थिति में विवाद की प्रक्रियाएं संपन्न की जाती हैं उन्हें कानूनी स्वीकृति अन्नादुरई के विधायी हस्तक्षेपों के माध्यम से ही मिली थी।
उन्होंने नवविवाहित दंपति से आग्रह किया कि वे भविष्य में अपनी संतानों के लिए केवल “सुंदर तमिल नाम” चुनें। उन्होंने क्रांतिकारी कवि भारतीदासन की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए दंपति से “परिवार के लिए प्रकाश और राष्ट्र के लिए सेवक” बनकर जीवन जीने का आह्वान किया।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common