नयी दिल्ली, गेमिंग उद्योग ने बृहस्तिवार को कहा कि नए ऑनलाइन गेमिंग नियम स्पष्ट रूप से पंजीकृत ई-स्पोर्ट्स को एक वैध खेल के रूप में मान्यता देते हैं। उद्योग का मानना है कि यह रूपरेखा वास्तवित रूप से पैसे से जुड़े मंच को ई-स्पोर्ट्स के रूप में खुद को पेश करने से रोकेगा।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने ई-स्पोर्ट्स टीमों और खिलाड़ियों के सामने आने वाले वित्तीय रूपरेखा की स्पष्टता की कमी जैसी प्रमुख कमियों की ओर ध्यान दिलाया। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि बैंक ई-स्पोर्ट्स से होने वाली कमाई और रियल मनी गेमिंग के बीच अंतर करने में अभी भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
यह प्रतिक्रिया केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए अधिसूचित नियमों के बाद आई है। ये नियम एक डिजिटल-फर्स्ट नियामक ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण के गठन का रास्ता साफ करते हैं और ये एक मई 2026 से प्रभावी होंगे।
नोडविन गेमिंग के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक अक्षत राठी ने कहा कि ये नियम भारत के ई-स्पोर्ट्स परिवेश में बहुप्रतीक्षित स्पष्टता और संरचना लाते हैं। उन्होंने प्रकाशकों द्वारा खेलों को ई-स्पोर्ट्स के रूप में औपचारिक रूप से पंजीकृत करने के प्रावधान को एक स्वागत योग्य कदम बताया और कहा कि यह असली पैसों वाले मंच को खुद को ई-स्पोर्ट्स घोषित करने से रोकेगा।
उन्होंने कहा खिलाड़ियों टीमों और प्रायोजकों के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है- एक बार पंजीकृत होने के बाद ई-स्पोर्ट्स को निर्विवाद रूप से एक वैध खेल विधा के रूप में मान्यता दी जाएगी।
एस8यूएल के सह-संस्थापक और सीईओ अनिमेष अग्रवाल ने कहा कि ये मानक ई-स्पोर्ट्स को ऑनलाइन मनी गेमिंग से स्पष्ट रूप से अलग करते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि ई-स्पोर्ट्स टीमों और खिलाड़ियों के लिए वित्तीय ढांचे पर स्पष्टता की कमी बनी हुई है और टीमों को संस्थाओं के रूप में पंजीकृत करने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं है।
साइबरपावरपीसी इंडिया के सीओओ विशाल पारेख ने कहा कि ये नियम भारतीय गेमिंग परिवेश में जवाबदेही लाएंगे जिससे वैश्विक भागीदारों और निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ेगा।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common