नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने दिल्ली हवाई अड्डे पर उच्च-स्तरीय हितधारक बैठक की अध्यक्षता की

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने आज दिल्ली हवाई अड्डे पर सभी प्रमुख हितधारकों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए, ‘हब-एंड-स्पोक’ संचालन को लागू करने के लिए हवाई अड्डे की तैयारियों की समीक्षा की।

इस बैठक में नागरिक उड्डयन सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों और गृह मंत्रालय (MHA), नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA), आव्रजन ब्यूरो (BoI), नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS), सीमा शुल्क, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), CISF, DigiYatra, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) और प्रमुख एयरलाइनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मंत्री ने यात्री प्रवाह प्रणालियों का ज़मीनी स्तर पर जायज़ा लेने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया, और परिचालन तैयारियों का आकलन करने के लिए दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 स्थित ‘सुरक्षा होल्ड एरिया’ (SHA) का निरीक्षण किया।

राम मोहन नायडू ने कहा, “पूर्वी और पश्चिमी गोलार्धों के बीच भारत की अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, इसे एक वैश्विक पारगमन केंद्र (ग्लोबल ट्रांज़िट हब) के रूप में उभरने में एक स्वाभाविक लाभ प्रदान करती है। और हमने सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह रणनीति तैयार की है, और मैं…” “इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में उनके सक्रिय सहयोग के लिए माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का मैं हृदय से आभारी हूँ।”

हब-एंड-स्पोक मॉडल के महत्व पर विस्तार से बताते हुए मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के तहत विकसित टियर-II और टियर-III हवाई अड्डों तथा अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने कहा कि जहाँ यात्रियों को यात्रा के समय में कमी का लाभ मिलेगा, वहीं देश भर में पहले से विकसित बुनियादी ढांचे का भी इष्टतम उपयोग हो सकेगा।हब-एंड-स्पोक रणनीति भारत के विमानन परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है; यह भारत को मुख्य रूप से ‘अंतिम-गंतव्य बाज़ार’ (end-destination market) से विकसित करके एक ‘वैश्विक ट्रांज़िट हब’ (global transit hub) में बदल देगी।

इसके परिणामस्वरूप, भारतीय हवाई अड्डे उस ‘ट्रांसफर ट्रैफिक’ (यात्रियों के आवागमन) का एक बड़ा हिस्सा अपने पास आकर्षित कर सकेंगे, जो वर्तमान में विदेशी हब के माध्यम से होकर गुज़रता है।सरकार के ‘हब विज़न’ को साझा करते हुए मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, “वर्तमान में, भारत से यात्रा करने वाले लगभग 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हब से होकर गुज़रते हैं।

हमारा लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी भारतीय हब विकसित करके इस प्रवृत्ति को पलटना है।”IGI हवाई अड्डे का उदाहरण देते हुए मंत्री ने कहा, “दिल्ली हवाई अड्डा अपनी उस क्षमता के कारण सबसे अलग है, जो प्रति वर्ष 100 मिलियन (10 करोड़) से अधिक यात्रियों को संभालने में सक्षम है। यह उत्तरी क्षेत्र के कुल यात्री यातायात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा संभालता है और प्रतिदिन लगभग 50,000 यात्रियों के ‘ट्रांसफर’ (आवागमन) का प्रबंधन करता है; इस प्रकार, इसने स्वयं को एक ‘स्वाभाविक हब हवाई अड्डे’ के रूप में स्थापित किया है।”

यात्रियों की सुविधा के अलावा, यह रणनीति भारत को एक वैश्विक एयर कार्गो हब के रूप में मज़बूत करने पर भी ज़ोर देती है। ट्रांसशिपमेंट कार्गो के लिए दोबारा स्क्रीनिंग की ज़रूरत को खत्म करना और कार्गो से जुड़े अप्रूवल और डॉक्यूमेंटेशन प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण जैसे उपायों से कार्यक्षमता में काफ़ी सुधार होने और टर्नअराउंड समय कम होने की उम्मीद है।https://x.com/RamMNK/status/2047356104460665158/photo/3

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