नोबेल विजेताओं ने वैश्विक नेताओं से मिस्र के राजनीतिक कैदियों का मुद्दा उठाने की मांग की

लंदन, साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लोगों के एक समूह ने बुधवार को वैश्विक नेताओं से आग्रह किया कि वे जलवायु शिखर सम्मेलन (सीओपी27) के लिए मिस्र की यात्रा के दौरान वहां मानवाधिकार के मुद्दे उठाएं।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित 15 लेखकों के समूह ने विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को एक पत्र भेजकर कहा कि सम्मेलन में भाग लेने वाले राजनयिक और नेतागण अपने एजेंडे का एक हिस्सा “मिस्र की जेलों में बंद हजारों राजनीतिक कैदियों को समर्पित करें।’’

समूह ने कार्यकर्ता अला अब्देल-फतह के मामले को विशेष रूप से उठाने का आग्रह किया है। अब्देल-फतह के परिवार ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को पूर्ण भूख हड़ताल शुरू की और उनकी योजना अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन के पहले दिन छह नवंबर से पानी भी नहीं पीने की है।

उनके परिवार ने आशंका जताई है कि अगर वह बिना पानी के रहते हैं तो 18 नवंबर को सम्मेलन समाप्त होने से पहले ही पानी के बिना उनकी मृत्यु हो सकती है।

मुखर असंतुष्ट और ब्रिटेन के नागरिक अब्देल-फतह 2011 के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के समय प्रमुखता से उभरे। 40 वर्षीय कार्यकर्ता पिछले एक दशक में अधिकांश समय जेल में रहे हैं।

वर्ष 2011 के आंदोलन में शामिल कई प्रमुख कार्यकर्ता देश से बाहर चले गए या अब जेल में हैं। उनमें से अधिकतर लोग 2013 में पारित एक कठोर कानून के तहत जेल में हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच नामक संगठन का अनुमान है कि मिस्र में 60,000 से अधिक राजनीतिक कैदी जेल में बंद हैं।

यह पत्र संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और अमेरिकी जलवायु दूत जॉन केरी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, महाराजा चार्ल्स तृतीय, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भेजा गया है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Associated Press (AP)

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