नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय को राज्य लोकायुक्त के दायरे में लाने के लिए प्रदेश सरकार को कानून में संशोधन करने का निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया था।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विधायिका को कानून बनाने के लिए परमादेश (सरकार को निर्देश) का रिट जारी नहीं किया जा सकता।
अधिवक्ता शिव कुमार त्रिपाठी द्वारा दायर जनहित याचिका में किसी भी भ्रष्ट गतिविधि पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री को लोकायुक्त के दायरे में लाने के लिए राज्य के 43 साल पुराने कानून में संशोधन का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
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