इस्लामाबाद पाकिस्तान अब देश में पेट्रोल की कीमतों में दैनिक आधार पर बदलाव करेगा। इस कदम का मकसद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से निपटना है। सरकार ने फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से ही कीमतों को साप्ताहिक आधार पर तय करना शुरू कर दिया था।
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मलेन में यह घोषणा करते हुए कहा कि मंत्रिमंडल ने कीमतें तय करने का काम ‘तेल एवं गैस नियामकीय प्राधिकरण (ओजीआरए) को सौंपने का फैसला किया है। प्राधिकरण दैनिक आधार पर ईंधन की कीमतें तय करेगा।
ओजीआरए न केवल अपनी वेबसाइट पर ईंधन की वे दरें प्रकाशित करेगा जिनका उपयोग कीमतें तय करने में किया जाता है बल्कि उन कारकों को भी प्रकाशित करेगा जिनकी वजह से हर पेट्रोल पंप पर हमें कीमतें दिखाई देती हैं।
सरकार हर सप्ताह तेल की कीमतें तय करती रही है लेकिन कम ईंधन कीमतों का फायदा आम लोगों तक पहुंचाने में देरी के कारण उसे आलोचना का सामना करना पड़ा है।
ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद सात-दिनों में कीमत संशोधन की प्रक्रिया अपनाई गई थी। इससे पहले कीमत हर पखवाड़े (15 दिन पर) तय की जाती थी। मलिक ने कहा कि यह कदम सरकार के उस फैसले का हिस्सा है जिसके तहत प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है ताकि लोग समझ सकें कि ईंधन की बढ़ती कीमतें क्यों जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि दैनिक आधार पर कीमतों की घोषणा अंतरराष्ट्रीय बाजार में सात-दिनों के साप्ताहिक औसत के आधार पर की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि नियमन के दायरे से बाहर करने की दिशा में एक और कदम के तौर पर देश में कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार तय की जाएंगी जिसके लिए किसी से सलाह लेने की जरूरत नहीं होगी। मलिक ने ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की हाल की तुर्की यात्रा के बाद तुर्किश पेट्रोलियम 20 साल के अंतराल के बाद पाकिस्तान में तेल और गैस उत्पादन के लिए अक्टूबर में आएगी।
सूचना मंत्री तरार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का संबंध क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति से है और स्थिति को सुलझाने के पाकिस्तान के प्रयासों की ‘पूरी दुनिया ने सराहना की है।’इस बीच ‘ऑल पाकिस्तान पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन’ ने कीमतों को नियमन का दायरे से बाहर करने की प्रस्तावित नीति को खारिज कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस नीति को वापस नहीं लिया गया तो वे अगले सप्ताह इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और हड़ताल करने पर विचार करेंगे।
एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन नोमान अली बट ने कहा कि सरकार को अपनी नीति पर फिर से विचार करना चाहिए और अपनी समस्याओं का बोझ पेट्रोल पंप मालिकों पर नहीं डालना चाहिए।
एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा ‘‘तेल विपणन कंपनियों के साथ दरें तय करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को भरोसे में लिया जाना चाहिए।’’क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common