पीएम मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की बातचीत के छह बड़े नतीजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की राजकीय यात्रा पर आए स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के साथ हैदराबाद हाउस में व्यापक बातचीत की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और व्यापार व निवेश, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान व तकनीक, और लोगों के बीच आपसी संबंधों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

दोनों नेताओं ने भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) से आर्थिक सहयोग में आई सकारात्मक गति का ज़िक्र किया और इनोवेशन-आधारित साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। छह नतीजों की घोषणा की गई, जिनमें माइग्रेशन और मोबिलिटी, युवा पेशेवर, परिवहन और बुनियादी ढांचा, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीक का हस्तांतरण और उद्यमिता शामिल हैं।माइग्रेशन और मोबिलिटी साझेदारी पर हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में पांच साल तक के लिए मल्टीपल-एंट्री वीज़ा और एक साल के नवीकरणीय (रिन्यूएबल) स्टूडेंट परमिट का प्रावधान है।इस साझेदारी का मकसद खास तौर पर युवाओं के लिए बेहतर रोज़गार के मौके बनाना भी है।

‘यंग प्रोफेशनल्स के आदान-प्रदान’ पर हुए समझौते के तहत हर देश से हर साल 300 प्रोफेशनल्स का आदान-प्रदान होगा, और भविष्य में यह संख्या बढ़कर 500 तक हो सकती है। नतीजों के मुताबिक, इससे नागरिकता और रेजिडेंसी स्टेटस की जांच का समय भी घटकर 30/90 दिन हो जाएगा और युवा प्रोफेशनल्स के ज़्यादा आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।दोनों पक्षों ने ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी, मोबिलिटी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने और उनमें सहयोग के लिए एक ‘मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग’ (समझौता ज्ञापन) की भी घोषणा की।

इसके मुख्य क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी और सुरंगें शामिल हैं। यह व्यवस्था टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, इंडस्ट्री और एकेडेमिया के बीच मज़बूत संबंध, तेज़ी से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा देती है।वैज्ञानिक सहयोग के तहत, भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच ‘लेटर ऑफ़ इंटेंट’ (इरादा पत्र) भविष्य की संयुक्त रिसर्च के लिए शुरुआती वैज्ञानिक सहयोग और साझेदारी का समर्थन करता है। इसका मकसद भारतीय और स्विस रिसर्च समुदायों के बीच लंबे समय तक सहयोग को बढ़ावा देना भी है।विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ़ एप्लाइड साइंसेज के बीच एक ‘इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट’ (कार्यान्वयन व्यवस्था) इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप में सहयोग को कवर करती है।

यह शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स के लिए इंडो-स्विस एकेडेमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग की सुविधा देती है, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देती है और क्षमता निर्माण को मज़बूत करती है।छठा नतीजा ‘इंडो-स्विस रिसर्च फ्लैगशिप इवेंट’ का पहला सत्र था, जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया था। यह पहल युवा रिसर्चर्स के लिए क्षमता निर्माण, टेक्नोलॉजी और कार्यप्रणाली के ट्रांसफर और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है।बातचीत में स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई संयुक्त रिसर्च पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने शांति, कूटनीति और वैश्विक संस्थाओं में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।https://x.com/narendramodi/status/2107092748952100952/photo/2

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