भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, CEC और दूसरे अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) के दौरान अहम फैसले एकतरफा तरीके से लिए जाने के आरोपों पर जारी किया गया है।सुनवाई के दौरान ‘फॉर्म 6’ के साथ जुड़ी एक अतिरिक्त घोषणा (डिक्लेरेशन) को लेकर भी चिंताएं जताई गईं; इस फॉर्म का इस्तेमाल वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन के लिए किया जाता है।
SIR के दौरान, आवेदकों से पूछा गया था कि क्या उनके खुद के नाम, या उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी के नाम, पहले हुए रिविज़न की वोटर लिस्ट में शामिल थे। आलोचकों का कहना था कि इससे पहली बार वोट देने वालों के लिए, खासकर उन लोगों के लिए जिनके परिवार के नाम पुरानी लिस्ट में नहीं थे, एक अतिरिक्त बाधा खड़ी हो सकती है।
चुनाव आयोग के इस दावे पर कि अतिरिक्त घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट की मंज़ूरी मिल गई थी, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने साफ़ किया कि कोर्ट ने फ़ॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी थी। कोर्ट ने यह पता लगाने के लिए संबंधित रिकॉर्ड माँगे कि यह बदलाव करने की अनुमति किसने दी थी।https://en.wikipedia.org/wiki/Gyanesh_Kumar#/media/File:The_Chief_Election_Commissioner_of_India,_Sh._Gyanesh_Kumar.jpg