पूरी दुनिया में महिलाओं के बुनियादी अधिकार और स्वतंत्रता का किस तरह हनन हो रहा है?

लंदन इराक से लेकर अफगानिस्तान और अमेरिका तक महिलाओं के बुनियादी अधिकार एवं स्वतंत्रता खत्म हो रही है क्योंकि सरकारों ने मौजूदा कानूनों को वापस लेना शुरू कर दिया है। अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबानी शासन ने कुछ महीने पहले अफगान महिलाओं के सार्वजनिक रूप से बोलने पर प्रतिबंध लगा दिया। देश में साल 2021 से सत्ता पर दोबारा काबिज हुए तालिबानी शासन ने वहां की महिलाओं पर यह नया प्रतिबंध लगाया है। इसके तहत अफगान महिलाएं घर के बाहर गाना ऊंची आवाज में पढ़ना कविता पढ़ना और यहां तक की हँस भी नहीं सकती हैं। सद्गुणों का प्रचार और दुराचार की रोकथाम से संबंधित तालिबान का मंत्रालय इन नियमों को लागू करता है। यह इस्लाम धर्म के कानूनों की सबसे कट्टरपंथी व्याख्याओं में से एक को लागू करता है। अफगानिस्तान में महिलाओं को सार्वजनिक रूप से अन्य महिलाओं के सामने कुरान जोर से पढ़ने पर भी प्रतिबंध है। अफगानिस्तान में पिछले तीन वर्षों में तालिबान ने वहां रहने वाली महिलाओं से कई बुनियादी अधिकार छीन लिए हैं। तालिबान ने साल 2021 से लड़कियों के शिक्षा प्राप्त करने पर भी कई प्रतिबंध लगाए हैं जिसमें पहले उनके सहशिक्षा पर रोक लगाई गई और फिर लड़कियों के माध्यमिक विद्यालय जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद 2023 में नेत्रहीन लड़कियों के स्कूलों को बंद कर दिया गया और चौथी से छठी कक्षा (नौ से 12 वर्ष की आयु) की लड़कियों के लिए स्कूल जाते समय अपना चेहरा ढंकना अनिवार्य कर दिया गया। अफगानिस्तान में महिलाएं अब विश्वविद्यालयों में प्रवेश नहीं ले सकतीं राष्ट्रीय स्तर पर डिग्री प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं कर सकतीं या कंधार क्षेत्र में दाई का काम या नर्सिंग प्रशिक्षण नहीं ले सकतीं। वहां महिलाओं को अब ‘फ्लाइट अटेंडेंट’ बनने या घर से बाहर नौकरी करने की भी अनुमति नहीं है। राजधानी काबुल में महिलाओं द्वारा संचालित बेकरी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब ज़्यादातर महिलाएं न तो पैसे कमा पा रही हैं और न ही घर से बाहर निकल पा रही हैं। इस साल तालिबान ने हेलमंद प्रांत में मीडिया से कहा कि वे महिलाओं की आवाज प्रसारित करने से भी बचें। महिला शांति और सुरक्षा सूचकांक में अफगानिस्तान अंतिम स्थान पर है और संयुक्त राष्ट्र तथा अधिकारियों ने इसे ‘‘लैंगिक रंगभेद’’ करार दिया है। कई राजनयिक इस बात पर चर्चा करते हैं कि महिलाओं के अधिकारों के संबंध में तालिबान के साथ बातचीत करना कितना महत्वपूर्ण है लेकिन इसके बावजूद वह इन प्रतिबंधों को रोक नहीं पाते हैं। जब राजनयिक मिलते हैं और बैठकें करते हैं तो वे आतंकवाद मादक पदार्थ व्यापारिक सौदों या बंधकों की वापसी जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं। अफगानिस्तान की महिलाओं के साथ इतने कम समय में जो कुछ भी हुआ है उसके बावजूद आलोचकों का कहना है कि यह मुद्दा शायद ही कभी राजनयिकों की प्राथमिकता सूची में शामिल होता है। इराक में शादी की उम्र : इराक में सांसद राद अल-मलिकी ने चार अगस्त 2024 को इराक के 1959 के व्यक्तिगत स्थिति कानून में संशोधन करने का प्रस्ताव पेश किया जिसमें शादी के लिए आयु 18 वर्ष से घटाकर नौ वर्ष हो सकती है ( या न्यायाधीश और माता-पिता की अनुमति से 15 वर्ष हो सकती है)।सरकार में रूढ़िवादी शिया गुटों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इराक के इस कानून में बदलाव होने से न केवल बाल विवाह को वैधानिक मान्यता मिल सकती है बल्कि महिलाओं के तलाक बच्चों की देखभाल और उत्तराधिकार से संबंधित अधिकार भी छिन सकते हैं। अमेरिका में गर्भपात का अधिकार : इस बीच अमेरिका में पिछले कुछ सालों में गर्भपात के अधिकार तक महिलाओं की पहुंच में काफी कमी आई है। एक अंतरराष्ट्रीय थिंकटैंक ने 2021 के अंत में आधिकारिक तौर पर अमेरिका को पिछड़ता हुआ लोकतंत्र करार दिया था। महिलाओं के अधिकारों की कमजोर स्थिति : यदि विश्व तालिबान के दुर्व्यवहारों इराक के प्रतिबंधात्मक कानूनों और गर्भपात पर अमेरिकी प्रतिबंधों को बर्दाश्त कर सकता है तो इससे वैश्विक स्तर पर महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के बारे में पता चलता है कि उन्हें छीनना कितना आसान है। संयुक्त राष्ट्र संघ की ‘यूएन वूमेन’ का मानना है कि कानूनी सुरक्षा में वैश्विक लैंगिक अंतर को पाटने में 286 वर्ष लग सकते हैं। लैंगिकता के आधार पर वेतन में अंतर कानूनी समानता और सामाजिक असमानता के स्तर के आधार पर अभी तक कोई भी देश लैंगिक समानता हासिल नहीं कर पाया है। दुनिया के हर कोने में महिलाओं और लड़कियों को भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि यह और भी बदतर होता जा रहा है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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