पोप और इमाम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मतदान से पहले शांति का आह्वान किया

संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा ‘‘मानवीय भाईचारे’’ के महत्व पर चर्चा करने के वास्ते बुधवार को बुलाई बैठक में पोप फ्रांसिस और एक प्रमुख सुन्नी इमाम ने शांति का आह्वान किया और संघर्ष को बढ़ावा देने वाले नफरती कृत्यों की निंदा की। पोप ने एक बयान में कहा कि तीसरा विश्व युद्ध ‘‘टुकड़े-टुकड़े’’ में लड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के संभावित विनाशकारी प्रभावों के चलते ‘‘ अब समय आ गया है कि युद्ध को स्पष्ट रूप से ‘‘ना’’ कहा जाए।’’ पोप पेट की सर्जरी के होने के कारण अभी अस्पताल में भर्ती हैं।

             काहिरा स्थित प्राचीन मस्जिद अल-अजहर के इमाम शेख अहमद अल-तैयब ने ऑनलाइन बैठक में कहा कि मानवीय भाईचारा वैश्विक शांति के लिए अहम है। उन्होंने और पोप ने 2019 में जारी एक संयुक्त दस्तावेज में भी यह बात कही थी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस महीने परिषद की अपनी अध्यक्षता में शांति को एक केंद्र बिंदु के रूप में लाने में भाईचारे के महत्व पर जोर दिया है।

             पोप, इमाम और परिषद के अन्य सदस्यों के भाषणों व अपील के बाद सदस्यों ने एक प्रस्ताव पारित किया कि जिसमें कहा गया है कि नफरत फैलाने वाले भाषण, नस्लवाद, जेनोफोबिया (विदेशियों से नफरत), असहिष्णुता, लैंगिक भेदभाव और अतिवाद के कृत्यों से हिंसा तथा संघर्ष को बढ़ावा मिलता है।  यूएई की राजदूत लाना नुसेबीह ने मतदान के बाद ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा कि यह एक ‘‘ऐतिहासिक’’ प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव पहली बार अभद्र भाषा, नस्लवाद, उकसावे और उग्रवाद के अलग-अलग तरीकों से निपटने के परिषद के पिछले प्रस्तावों को एक साथ लाता है। उन्होंने कहा कि यह सहिष्णुता, समानता, सह-अस्तित्व और संवाद को बढ़ावा देता है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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