रोम, पोप फ्रांसिस ने शुक्रवार को ‘ओल्ड लातिन मास’ के प्रसार पर कार्रवाई करते हुए पूर्व पोप बेनेडिक्ट 16वें के फैसले को पलट दिया। परंपरावादी कैथोलिक सदस्यों ने इसकी निंदा करते हुए इसे उनपर और प्राचीन प्रार्थना पद्धति पर हमला करार दिया।
ये प्रतिबंध तात्कालिक रूप से प्रभाव में आ गए हैं।
फ्रांसिस ने ‘लातिन मास’ (लातिन भाषा में प्रार्थना सभा) के आयोजन पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया है। 2007 में बेनेडिक्ट ने इसकी छूट दी थी। पोप ने कहा कि बेनेडिक्ट के सुधार चर्च में विभाजन का स्रोत बन गए थे और कैथोलिक ‘सेकंड वेटिकन काउंसिल’ (1960 में हुई बैठक जिसमें प्रार्थना पद्धति को आधुनिक किया गया था) का विरोध करने के लिए एक औजार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। फ्रांसिस ने कहा कि उन्हें इसी वजह से कार्रवाई करनी पड़ी।
उन्होंने एक नया कानून जारी किया है जिसमें व्यक्तिगत बिशप को ‘ओल्ड मास’ (प्राचीन तरीके से प्रार्थना करना) के लिए मंजूरी लेनी होगी। नए कानून के तहत बिशप को यह भी निर्धारित करना होगा कि क्या ‘ओल्ड मास’ से जुड़े धर्मावलंबियों का मौजूदा समूह ‘वैटिकन द्वितीय’ को स्वीकार करता है जो प्रार्थना को लातिन भाषा के बजाय मातृ
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