प्रधानमंत्री मोदी ने एशियाई खेल 2026 में भाग लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों के दल से बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई खेल 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय दल से मुलाकात की और इस महाद्वीपीय खेल आयोजन में खिलाड़ियों की उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी। पदक विजेताओं, कोचों और सपोर्ट स्टाफ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने 140 करोड़ नागरिकों को गौरवान्वित किया है और राष्ट्रीय ध्वज का मान बढ़ाया है। इस अवसर पर केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मंडाविया तथा युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे भी मौजूद थीं।

इतने सारे पदक विजेताओं से एक साथ मिलकर प्रधानमंत्री मोदी ने खुशी जताई और उनके जुनून, दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की यह सफलता केवल उन व्यक्तियों की नहीं है जिन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, बल्कि यह पूरे देश की सफलता है। उन्होंने भारतीय दल की इन उपलब्धियों में योगदान देने के लिए कोचों, सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों के परिवारों को भी बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका जीवन और दृष्टिकोण देश के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

एशियाई खेल 2026 में भारत के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए, मोदी ने कहा कि यह आयोजन कई मायनों में देश के लिए यादगार रहा। उन्होंने विशेष रूप से पुरुष और महिला हॉकी टीमों को स्वर्ण पदक जीतने के लिए बधाई दी और बताया कि महिला टीम ने 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए यह खिताब जीता है। उन्होंने पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों के प्रदर्शन की भी सराहना की, जिन्होंने लगातार दूसरे संस्करण में पदक हासिल किए। इसके अलावा, उन्होंने पुरुष और महिला कबड्डी टीमों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने स्वर्ण पदक जीते। प्रधानमंत्री ने अन्य खेलों में भारत की उपलब्धियों का भी जिक्र किया, जिनमें तीरंदाजी में पांच स्वर्ण पदक, शूटिंग, बॉक्सिंग और कुश्ती में शानदार प्रदर्शन, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड, 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में पदक और 1982 के बाद पहली बार मैराथन में मिली सफलता शामिल हैं।

मोदी ने विशेष रूप से महिला एथलीटों के योगदान की सराहना की, जिन्होंने भारत के 85 पदकों में से 38 पदक जीते, जिनमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धियां भारतीय खेलों में महिलाओं की बढ़ती ताकत और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं। उन्होंने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, सॉफ्ट टेनिस और कुछ सेलिंग इवेंट्स जैसे खेलों में भारत के पहले एशियाई खेल पदकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय एथलीट अब उन खेलों में भी पदक जीत रहे हैं, जिनमें देश को पहले कभी महाद्वीपीय स्तर पर सफलता नहीं मिली थी।

एथलीटों को और बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, प्रधानमंत्री ने “हम यह कर दिखाएंगे!” (We will Do it!) के नारे के साथ उनसे कई संकल्प लिए। उन्होंने एथलीटों से आग्रह किया कि वे खेलों में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाएं, नए रिकॉर्ड बनाएं और अलग-अलग खेलों में चैंपियन तैयार करें।

जिस जगह पर यह बातचीत हो रही थी, उसका नाम हॉकी के दिग्गज मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा गया है। इस संदर्भ में मोदी ने ध्यानचंद के समर्पण और देर रात तक चलने वाले उनके अभ्यास सत्रों को याद किया। उन्होंने कहा कि ध्यानचंद का यह समर्पण खेल के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए धैर्य, लगन और लगातार कड़ी मेहनत के महत्व को दिखाता है।

प्रधानमंत्री ने पिछले 10 से 12 वर्षों में भारत के खेल इकोसिस्टम में आए बदलावों के बारे में भी बात की। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय ऐसा था जब भारत बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में बहुत कम पदक जीतता था और ओलंपिक में आधे से ज्यादा खेलों में तो हिस्सा भी नहीं लेता था। उन्होंने कहा कि सरकार ने ज्यादा लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देकर और एक आधुनिक तथा पारदर्शी खेल इकोसिस्टम विकसित करके इस स्थिति को बदलने का काम किया है।

मोदी ने देश में खेलों को मजबूत करने की दिशा में ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) की शुरुआत और ‘खेलो इंडिया’ पहल के विस्तार को महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने बताया कि ‘खेलो इंडिया’ के विस्तार और खेल महासंघों को मजबूत करने के लिए 36,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है।

खेल बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरे देश में 1,000 से अधिक ‘खेलो इंडिया केंद्र’ स्थापित किए गए हैं। उन्होंने शहरों और कस्बों में स्टेडियम, मिनी-स्टेडियम, मल्टीपर्पस स्पोर्ट्स हॉल, एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान, हॉकी मैदान और स्विमिंग पूल के निर्माण का भी जिक्र किया। मोदी ने विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के तहत खिलाड़ियों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि TOPS (टॉप्स) के अंतर्गत आने वाले खिलाड़ियों को हर महीने 50,000 रुपये का भत्ता मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उन खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता दे रही है, जिन्हें विदेश में विशेष प्रशिक्षण की जरूरत है, ताकि वे वहां जाकर कोचिंग और ट्रेनिंग ले सकें।

प्रधानमंत्री ने विंटर गेम्स, संसद खेल प्रतियोगिताओं और नई खेल नीति ‘खेलो भारत नीति’ जैसी पहलों का भी उल्लेख किया, जिनका मकसद खेलों में भाग लेने और प्रतिस्पर्धा करने के मौकों को बढ़ाना है। उन्होंने दिव्यांग खिलाड़ियों की उपलब्धियों की तारीफ की और उन्हें बेहतर सुविधाएं तथा खेल के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों पर जोर दिया।

एशियाई खेलों में 15 से 17 साल के युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए, मोदी ने कम उम्र में ही खेल प्रतिभाओं की पहचान करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ‘खेलो इंडिया’ और ‘इमर्जिंग खेलो इंडिया’ जैसी पहलों के जरिए 5 से 15 साल के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करने और उन्हें ट्रेनिंग देने पर ध्यान दे रही है।

भविष्य की ओर देखते हुए, प्रधानमंत्री ने 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भारत की तैयारियों, 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) की मेजबानी और 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने की भारत की इच्छा का जिक्र किया। उन्होंने लाल किले से की गई अपनी उस घोषणा को याद दिलाया, जिसमें गांव स्तर पर होनहार खिलाड़ियों की पहचान करने के लिए देशव्यापी ‘टैलेंट हंट’ (प्रतिभा खोज) की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि हजारों युवा खिलाड़ियों को अपनी क्षमताओं को निखारने और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने के अवसर दिए जाएंगे।

मोदी ने एक प्रमुख खेल राष्ट्र और विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के साथ एक वैश्विक खेल केंद्र (स्पोर्ट्स हब) बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को भी दोहराया। उन्होंने खिलाड़ियों से देश के हर हिस्से से चैंपियन तैयार करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया और अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

खेल उपलब्धियों को भारतीय युवाओं की अन्य क्षेत्रों की आकांक्षाओं से जोड़ते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि युवा भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह विकास, रक्षा नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने गौर किया कि देश के संस्थागत और आर्थिक माहौल में आए बदलावों की मदद से, छोटे शहरों और गांवों के युवा अब नवाचार, उद्यमिता और अनुसंधान में तेजी से भाग ले रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने भारत के खेल इकोसिस्टम के विस्तार से पैदा हो रहे रोजगार के अवसरों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलों के विकास से कोचिंग, फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों में नए पेशेवर रास्ते खुल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन अवसरों की बदौलत युवा प्रतिस्पर्धी खेलों के अलावा भी अपने करियर और उद्यमशीलता से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा सकते हैं।

मोदी ने पदक जीतने वाले खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे अगली पीढ़ी की खेल प्रतिभाओं को तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने उन्हें स्कूलों में जाने, अपने गांवों और शहरों के बच्चों से बातचीत करने और उन मैदानों पर वापस जाने के लिए प्रोत्साहित किया, जहां से उन्होंने खुद अपने खेल सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि अपने अनुभवों और चुनौतियों को साझा करने से उभरते खिलाड़ियों को प्रेरणा मिल सकती है और अधिक बच्चे खेलों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि खेलों का महत्व केवल पदक और ट्रॉफियां जीतने तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि खेलों में भाग लेने से अनुशासन, विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता, परिस्थितियों के अनुसार ढलने का गुण और दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में लगातार काम करने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि ये गुण न केवल खेल के मैदान में, बल्कि पूरे जीवन में बहुत काम आते हैं।

अपने संबोधन के अंत में, मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत विकास और देश की प्रगति के लिए खेलों में भाग लेना बहुत जरूरी है। उन्होंने अपना यह मंत्र दोहराया, “जो खेलेगा, वह खिलेगा।” उन्होंने खिलाड़ियों के साथ मिलकर “हम करके दिखाएंगे!” का संकल्प लिया। इस दौरान उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने, दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने, आत्मनिर्भर बनने, एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र (मैन्युफैक्चरिंग हब) के रूप में उभरने, तकनीकी नेतृत्व को मजबूत करने, अंतरिक्ष अन्वेषण को आगे बढ़ाने और ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भरोसा जताया कि उनका उत्साह, दृढ़ संकल्प और खुद पर विश्वास, अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत को और अधिक सफलता दिलाने में मदद करेगा।

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