लंदन, भारत की कंपनी ‘विन्स बायोप्रोडक्ट्स लिमिटेड’ और जर्मनी की कंपनी ‘नियोवी बायोटेक जीएमबीएच’ अंग प्रतिरोपण में इस्तेमाल होने वाली दवा सहित ‘इम्युनोग्लोबुलिन’ उत्पादों के निर्माण एवं व्यावसायिक बिक्री के लिए मिलकर काम करेंगी और इसके तहत संबंधित प्रौद्योगिकी भी भारत को हस्तांतरित की जाएगी। बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी।
‘इम्युनोग्लोबुलिन’ एक प्रकार का प्रोटीन है जिसे प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) भी कहा जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
दूतावास ने बताया कि उसने 13 अक्टूबर को आयोजित भारत-जर्मनी स्वास्थ्य नेतृत्व संवाद के दौरान ‘नियोवी बायोटेक जीएमबीएच’ और ‘विन्स बायोप्रोडक्ट्स लिमिटेड’ के बीच समझौते में मदद की।
इस सहयोग के तहत ‘इम्युनोग्लोबुलिन’ उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इनमें ‘एंटी-थाइमोसाइट ग्लोबुलिन’ भी शामिल है जिसका इस्तेमाल मनुष्यों में अंग प्रतिरोपण और रक्त संबंधी कुछ विकारों के इलाज में किया जाता है।
भारतीय दूतावास ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘‘बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास ने 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित भारत-जर्मनी स्वास्थ्य नेतृत्व संवाद के दौरान जर्मनी की नियोवी बायोटेक जीएमबीएच और भारत की विन्स बायोप्रोडक्ट्स लिमिटेड के बीच गोपनीयता समझौते के आदान-प्रदान में मदद की।’’
दूतावास ने कहा ‘‘इस समझौते से इम्युनोग्लोबुलिन उत्पादों के निर्माण भारत को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उनकी व्यावसायिक बिक्री में सहयोग का रास्ता खुलेगा। इनमें अंग प्रतिरोपण और रक्त संबंधी कुछ विकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाला ‘एंटी-थाइमोसाइट ग्लोबुलिन’ भी शामिल है।’’
दोनों कंपनियों के बीच प्रस्तावित सहयोग से अंग प्रतिरोपण और रक्त संबंधी कुछ विकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले विशेष जैविक उत्पादों के निर्माण में भारत की घरेलू क्षमता बढ़ सकती है। अगर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारत में इन उत्पादों का निर्माण शुरू होता है तो इससे इनकी उपलब्धता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
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