प्रधानमंत्री मोदी ने बाइडन नीत सीओपी-26 कार्यक्रम में पारदर्शी वित्त की अपील की

ग्लासगो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां मंगलवार को सीओपी-26 जलवायु शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की पहल वाले एक गोलमेज कार्यक्रम के दौरान बुनियादी ढांचा का निर्माण करने में महत्वपूर्ण पहलुओं के तहत पारदर्शी जलवायु वित्त सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘बिल्ड बैक बेटर फॉर द वर्ल्ड’ (बी3डब्ल्यू) गोलमेज कार्यक्रम में भाग लिया, जिसे बाइडन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन ने भी संबोधित किया।

मोदी ने ट्वीट किया, ‘ राष्ट्रपति जो बाइडन और उर्सुला वोन डेर लेयेन की मेजबानी में बिल्ड बैक बेटर फॉर द वर्ल्ड’ (बी3डब्ल्यू) का सत्र सार्थक रहा।’

विदेश मंत्रालय ने कार्यक्रम के बारे में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचा निर्माण में चार पहलुओं को सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित किया : जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से उबरने की क्षमता तैयार करना, पारंपरिक ज्ञान को शामिल करना, गरीब और जोखिमग्रस्त समुदायों को प्राथमिकता देना तथा सभी देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने वाले सतत एवं पारदर्शी वित्त मुहैया करना।’’

भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने यहां एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा, ‘ प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन के बारे में बात की, जिसमें उन्होंने पारंपरिक ज्ञान, गरीबों व कमजोरों पर तथा टिकाऊ व पारदर्शी वित्त को प्राथमिकता पर जोर दिया, जो सभी राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता हो।’

भारत अपने पड़ोस में ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव ’ (बीआरआई) के तहत चीनी बुनियादी ढांचा के निर्माण पर आपत्ति जता रहा है। दरअसल, चीन और पाकिस्तान, पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बुनियादी ढांचे की कई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।

बाइडन ने यह कहते हुए गोलमेज कार्यक्रम की शुरूआत की कि ग्लासगो सम्मेलन महत्वाकांक्षा व नवोन्मेष का एक दशक होना चाहिए।

बाइडन ने कहा, ‘‘मेरा बिल्ड बैक बेटर फ्रेमवर्क स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक निवेश करेगा, जो जलवायु संकट से निपटने के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण निवेश होगा और जो किसी भी विकसित राष्ट्र ने अब तक नहीं किया होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सोलर पैनल और पवन चक्कियों के विनिर्माण का वित्त पोषण करेगा, जो भविष्य के ऊर्जा क्षेत्र के बढ़ते बाजार हैं।’’

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Getty Images

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