कोलकाता, पश्चिम बंगाल वन विभाग और रेलवे के समन्वित प्रयासों व घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) के शुरू होने से पिछले दो साल में उत्तरी बंगाल के वन अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों से गुजरने वाली रेल पटरियों को पार करते समय हाथियों की मौत की कोई घटना नहीं हुई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेल पटरियां बुक्सा बाघ अभयारण्य जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान और चापरामारी वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरती हैं। उन्होंने कहा कि इन जगहों पर वन विभाग व रेलवे की संयुक्त निगरानी और आईडीएस के कारण पिछले दो साल में रेल की चपेट में आने से हाथियों की मौत की कोई घटना नहीं हुई।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दोनों पक्षों द्वारा गठित एक संयुक्त निगरानी समिति में रेलवे नियंत्रण कक्षों में तैनात वन अधिकारी शामिल हैं जो हाथियों की आवाजाही पर वास्तविक समय में जानकारी प्रदान करते हैं और चिह्नित गलियारों में गति पर सख्त प्रतिबंध लगाते हैं।
अधिकारी ने बताया कि जहां 2004 से 2013 के बीच इस क्षेत्र में रेलगाड़ियों की चपेट में आने से 50 से अधिक हाथियों की मौत हुई थी वहीं 2013 से 2023 के बीच मदारीहाट-हासीमारा और राजभटखावा-अलीपुरदुआर जंक्शन (बुक्सा) मार्गों सहित लगभग 30 हाथी रेलगाड़ियों की चपेट में आए।
उन्होंने कहा कि इसके विपरीत पिछले दो साल में कड़ी निगरानी के कारण इन गलियारों में एक भी हाथी की मौत नहीं हुई।
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में महानंदा वन्यजीव अभयारण्य चापरामारी वन्यजीव अभयारण्य जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान (मदारीहाट) और बुक्सा बाघ अभयारण्य से होकर गुजरने वाले क्षेत्र शामिल हैं।
आईडीआर में इस्तेमाल किए जा रहे कैमरे अंधेरे कोहरे या बारिश में भी 700-750 मीटर की दूरी तक हाथियों का पता लगाने में सक्षम हैं।
अधिकारी ने कहा “मुख्य रूप से 52 किलोमीटर लंबे मदारीहाट-नागराकाटा खंड और बुक्सा बाघ अभयारण्य पर ध्यान केंद्रित किया गया है तथा इन सेंसरों की मदद से इन खंडों में हाथियों के साथ होने वाली इन खतरनाक दुर्घटनाओं में कमी आई है और इन्हें रोका जा सका है।”
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common