हैरिसबर्ग (अमेरिका), अमेरिका के कम से कम आठ राज्यों ने कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ओपनएआई के खिलाफ मुकदमा दायर किया है और उनका आरोप है कि कंपनी का लोकप्रिय चैटबॉट बच्चों को नुकसान पहुंचा रहा है और वयस्कों को गुमराह कर रहा है।
अभियोजकों ने आरोप लगाया कि कंपनी मुनाफा कमाने की होड़ में लापरवाही बरत रही है और उसका चैटबॉट राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन कर रहा है। मुकदमों में कहा गया है कि कंपनी का चैटबॉट मॉडल ‘चैटजीपीटी’ खतरनाक चिकित्सकीय सलाह दे रहा है लोगों के मन में संदेह और भ्रम को बढ़ावा दे रहा है तथा उन्हें आत्महत्या करने या दूसरों को चोट पहुंचाने अथवा उनकी हत्या करने के लिए उकसा रहा है।
मुकदमों में यह भी आरोप लगाया गया है कि चैटबॉट खुद को संवेदनशील दिखाते हैं लेकिन वास्तव में वे कमजोर परिस्थितियों में रहने वाले लोगों और किशोरों का फायदा उठा रहे हैं। किशोर वह पहली पीढ़ी हैं जो कृत्रिम मेधा के साथ बड़ी हो रही है।
आयोवा की अटॉर्नी जनरल ब्रेना बर्ड ने एक बयान में कहा ‘‘ओपनएआई बच्चों को नुकसान पहुंचा रहा है और वह आयोवा के लोगों से झूठ बोल रहा है।’’
राज्यों ने ओपनएआई पर अनियंत्रित एआई मॉडल तैयार करने का आरोप भी लगाया। एक मुकदमे में इन्हें ‘साइबर हैकिंग एजेंट’ कहा गया है। आरोप है कि इन मॉडल ने दूसरी कंपनियों के सिस्टम में सेंध लगाई इंसानी उपयोगकर्ताओं से झूठ बोला और अपने लिए नए मिशन संबंधी निर्देश तक लिखे।
सैन फ्रांसिस्को स्थित ओपनएआई ने एक बयान में कहा कि कंपनी ने बच्चों के लिए चैटजीपीटी में सुरक्षा उपाय शामिल किए हैं और मॉडल को बेहतर बनाने के लिए वह ऐसे उपाय जारी रखेगी।
कंपनी ने यह भी कहा कि वह उन मॉडल की समीक्षा कर रही है जिन्हें उसने अपने निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप काम नहीं करने वाला बताया है। कंपनी के अनुसार उसे जुलाई में सामने आई उस घटना जैसा कोई मामला नहीं मिला है जिसमें एक एआई एजेंट ने दूसरी एआई कंपनी के सिस्टम में सेंध लगाई थी।
बुधवार को अलग-अलग मुकदमे दायर करने वाले राज्यों में एरिजोना अर्कांसस इडाहो कंसास मोंटाना नेब्रास्का और वेस्ट वर्जीनिया शामिल हैं।
‘सोशल मीडिया विक्टिम्स लॉ सेंटर’ के संस्थापक वकील मैथ्यू बर्गमैन ने इन मुकदमों को ‘‘कृत्रिम मेधा कंपनी के खिलाफ अब तक की गई सबसे महत्वपूर्ण समन्वित कार्रवाई’’ बताया।
एरिजोना ने अपने मुकदमे में कहा कि चैटजीपीटी किशोरों को उसके साथ निजी जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है और कभी-कभी उन्हें यह जानकारी अपने माता-पिता अधिकारियों या दोस्तों के साथ साझा नहीं करने की सलाह देता है।
राज्यों का कहना है कि किशोरों और अनियंत्रित एआई एजेंटों से आम जनता को होने वाले जोखिमों तथा नुकसान का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन ओपनएआई ने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि चैटजीपीटी की पर्याप्त सुरक्षा जांच की जाती है जबकि कंपनी मुनाफे के लिए सुरक्षा उपायों को कमजोर कर रही है।
इडाहो ने अपने मुकदमे में कहा ‘‘इस राजस्व की भारी कीमत जनता को चुकानी पड़ी है। ओपनएआई के लापरवाही भरे व्यवहार और चैटजीपीटी के विशिष्ट रूप से खतरनाक तरीके एवं सामग्री के कारण लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है परेशान करने वाले साइबर हमले हुए हैं और अब सभ्यता के पतन का वास्तविक खतरा पैदा हो गया है।’’
राज्यों ने अपने मुकदमों में कहा कि चैटजीपीटी दुनिया का सबसे लोकप्रिय चैटबॉट है और अमेरिकी बाजार में उसकी हिस्सेदारी करीब आधी है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common