जम्मू, जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि के मद्देनजर सुरक्षा विशेषज्ञों ने सुरक्षा बलों द्वारा अपनाई गई मौजूदा आतंकवाद-रोधी रणनीतियों का व्यापक पुनर्मूल्यांकन करने का सुझाव दिया है।
उधमपुर स्थित उत्तरी कमान के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. हुड्डा ने आतंकवादियों की बदलती रणनीति का मुकाबला करने के लिए सक्रिय दृष्टिकोण की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। पूर्व उप सेना प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह संघा ने विश्वास व्यक्त किया कि सुरक्षा बल अपनी हाल की गलतियों से सीखेंगे और आतंकवाद-रोधी प्रयासों में सुधार करेंगे।
जम्मू क्षेत्र में पिछले कुछ सप्ताह में कई हिंसक घटनाएं हुई हैं। हाल ही में कठुआ के माचेडी के सुदूर वन क्षेत्र में घात लगाकर किए गए हमले में एक कैप्टन समेत नौ जवानों की जान चली गई थी।
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हुड्डा ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया ‘‘समय के साथ हमने रणनीति में बदलाव देखा है जिसमें आतंकवादी तेजी से घात लगाकर हमला करने और ‘गोली मारकर भाग जाने’ की रणनीति अपना रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को संभावित कमियों को समझने और सुधारने के लिए अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।
जम्मू और घाटी के अभियानगत वातावरण के बीच अंतर बताते हुए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हुड्डा ने कहा कि कश्मीर में आतंकवादी अक्सर स्थानीय क्षेत्रों में ही सीमित रहते हैं जबकि जम्मू में आतंकवादी रणनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाकों में हमले की साजिश रचते हैं जिससे सैन्य अभियान जटिल हो जाते हैं। उन्होंने बताया ‘‘कुछ क्षेत्रों में सैनिकों को एक विशिष्ट स्थान तक पहुंचने के लिए आठ से 10 घंटे तक पैदल चलना पड़ सकता है।’’
वहीं पूर्व उप सेना प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह संघा ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा ‘‘हमें ईमानदारी से सही सबक सीखने की जरूरत है और यह सुनिश्चित करना होगा कि गलतियां दोबारा न हों।’’ उन्होंने धैर्य और आजमायी हुई सैन्य रणनीति के पालन के महत्व पर बल दिया। संघा ने बताया कि इस संदर्भ में पारंपरिक खुफिया जानकारी जुटाने की विधियां कम प्रभावी हो सकती हैं जिससे रणनीति और प्रक्रियाओं के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता का संकेत मिलता है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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