कोलकाता, बांग्लादेश में जारी अशांति के कारण भारत और उसके संबंधों में व्याप्त तनाव के बीच कोलकाता में सोमवार को आयोजित विजय दिवस समारोह में भाग ले रहे एक मुक्ति योद्धा ने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष भी बांग्लादेश के निर्माण के उत्सव में कोई अंतर नहीं है।
मुक्ति योद्धा लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) काजी सज्जाद अली जहीर ने बांग्लादेश के लोगों के लिए भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा दिए गए बलिदान को याद करते हुए कहा ‘‘हम जो यहां आए हैं स्वतंत्रता सेनानी हैं हमने भारतीय सेनाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी।’’
फोर्ट विलियम स्थित सेना की पूर्वी कमान के मुख्यालय में पुष्पांजलि समारोह के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) जहीर ने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बंगाली आबादी को भारतीय लोगों द्वारा दी गई सहायता का भी उल्लेख किया।
जहीर से जब बांग्लादेश में कुछ लोगों द्वारा दिए गए भारत विरोधी बयानों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ‘‘बांग्लादेश एक शांतिपूर्ण राष्ट्र है। आप इधर-उधर से बयान सुन सकते हैं लेकिन इतिहास बहुत उत्साहित करने वाला है।’’उन्होंने परस्पर विकास के लिए दोनों पड़ोसियों के बीच अच्छे संबंधों के महत्व पर भी जोर दिया।
बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को लेकर जहीर ने कहा ‘‘हम पड़ोसी हैं और एक-दूसरे के विकास के लिए हमें अच्छा पड़ोसी बनना होगा। दोस्ती टिकाऊ होनी चाहिए।’’ बांग्लादेश में पांच अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यक हिंदुओं को 200 से अधिक हमलों का सामना करना पड़ा है। बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद भारत द्वारा पद्मश्री से सम्मानित जहीर ने पाकिस्तान की विशिष्ट 14वीं पैरा ब्रिगेड के सदस्य के रूप में अपनी पृष्ठभूमि साझा की। तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में हो रहे अत्याचारों के बारे में जानने के बाद वह पाकिस्तानी सेना छोड़कर भारत आ गए थे।
जहीर ने 1971 के युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की जीत को विश्व इतिहास की सबसे बेहतरीन जीत में से एक बताते हुए कहा कि संघर्ष के दौरान भारतीय सेना द्वारा अत्याचार का एक भी मामला सामने नहीं आया था।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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