नयी दिल्ली, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये के मूल्य में बाहरी कारकों के चलते काफी गिरावट आई है और घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपने प्रयास जारी रखेगा। सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार सहित भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी कारक मजबूत हैं और आरबीआई घरेलू मुद्रा में स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठा रहा है।
उन्होंने यहां ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा मुझे भरोसा है कि आरबीआई रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए आगे भी कदम उठाएगा। प्रतिभूति बाजार में करों के बारे में पूछे जाने पर सीतारमण ने कहा कि प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर में बदलाव को लेकर चर्चा होना अच्छा है और वह इस संबंध में दिए जा रहे सुझावों को गंभीरता से सुनेंगी। उन्होंने कहा ‘‘हम बजट के काफी करीब हैं और इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। मेरे लिए यह बताने का सबसे अच्छा समय नहीं है कि मैं किन प्रस्तावों पर विचार करूंगी और किन पर नहीं।’’
वित्त मंत्री ने कहा कि दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर ऐसा विषय है जिस पर कई लोग अपनी राय रख रहे हैं। भारत और विदेश में निवेशकों के साथ हुई बातचीत में भी यह मुद्दा उठा है। उन्होंने कहा ‘‘इस विषय पर चर्चा होना अच्छी बात है और मैं इन विचारों को गंभीरता से सुनूंगी।’’ वित्त वर्ष 2027-28 का केंद्रीय बजट अगले साल एक फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है। रुपये में गिरावट के मुद्दे पर सीतारमण ने कहा कि आरबीआई अपने उपायों के जरिये रुपये के मूल्य का कोई निश्चित स्तर तय करने के बजाय उसमें अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा ‘‘आरबीआई के ये प्रयास जारी रहेंगे। हालांकि उसका उद्देश्य रुपये का मूल्य तय करना नहीं है। हम चाहेंगे कि रुपया अपना स्तर खुद ही तय करे।’’रुपये में गिरावट थामने के लिए रिजर्व बैंक ने सप्ताहांत में कई उपायों की घोषणा की थी। केंद्रीय बैंक ने पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए एक विशेष सुविधा बनाने की घोषणा की जिससे डॉलर की उनकी मांग हाजिर बाजार से हट सकेगी। इसके अलावा रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियम सख्त किए गए हैं।
सीतारमण ने कहा कि आरबीआई के हालिया उपायों से रुपये को समर्थन मिला है। सोमवार को रुपये के मूल्य में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि मंगलवार को शुरुआती कारोबार में यह मजबूत होकर 94.96 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि भारत के आर्थिक बुनियादी कारक मजबूत हैं और देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। रुपये में पिछले डेढ़ साल के दौरान काफी गिरावट आई है जिसकी मुख्य वजह बाहरी चुनौतियां हैं। सीतारमण ने कहा ‘‘देश के भीतर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि व्यापक आर्थिक बुनियादी कारक मजबूत बने रहें। राजकोषीय अनुशासन निवेशकों के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए। लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये में होने वाली घट-बढ़ एक चुनौती है और हम इस पर ध्यान देंगे।’’ पश्चिम एशिया संकट के बीच रुपये को समर्थन देने के लिए सरकार और आरबीआई ने जून में देश में डॉलर का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से कई कदमों की घोषणा की थी।
रुपये को समर्थन देने के लिए सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश बढ़ाने को एफएआर के तहत नए निर्गमों को शामिल किया और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को ब्याज आय तथा पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट दी। वहीं आरबीआई की अदला-बदली सुविधा के तहत बैंकों ने एफसीएनआर (बी) जमा योजना में 133 अरब डॉलर जुटाए।
निजी क्षेत्र के निवेश पर सीतारमण ने कहा कि घरेलू निजी पूंजी भारत में निवेश कर रही है और देश विदेश से भी निवेश आकर्षित कर रहा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा सेमीकंडक्टर एवं चिप डिजाइन बायोसिमिलर दवा उद्योग जेनेरिक दवाओं के विनिर्माण तथा विमान के रखरखाव मरम्मत एवं देखभाल (एमआरओ) केंद्रों जैसे क्षेत्रों में निवेश आ रहा है। सीतारमण ने कहा कि इन क्षेत्रों में वे कंपनियां भी निजी पूंजी लगा रही हैं जो अपने मौजूदा कारोबार का विस्तार कर रही हैं और वे भी जो नए क्षेत्रों में प्रवेश कर रही हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common