जमशेदपुर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भगवद् गीता की आध्यात्मिक शिक्षाएं आज के युवाओं को एक नई दिशा दे सकती हैं और उनके जीवन को संवार सकती हैं। मुर्मू झारखंड के जमशेदपुर के कदमा क्षेत्र में श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र न्यास के शिलान्यास समारोह के बाद एक सभा को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा “जमशेदपुर में भगवान जगन्नाथ मंदिर आध्यात्मिक शिक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव का केंद्र होगा। यहां छात्रावास में लड़कियों सहित गरीब बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित होगी।” राष्ट्रपति ने कहा कि भगवद् गीता में निहित शिक्षाएं आत्मिक पोषण हैं।मुर्मू ने प्रस्तावित आध्यात्मिक केंद्र के निर्माण में योगदान देने वालों की भी सराहना की।उन्होंने इस बारे में कहा कि यह युवाओं में भगवद् गीता की शिक्षाओं को आत्मसात करने और उनके व्यक्तित्व को आकार देने में मदद करेगा। राष्ट्रपति ने कहा “हमारी आध्यात्मिक परंपरा में सभी जीवित प्राणियों और पौधों के प्रति प्रेम व करुणा की भावना को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।”
उन्होंने कहा “महाप्रभु जगन्नाथ समस्त ब्रह्मांड के स्वामी हैं। उनकी कृपा समस्त मानवता पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से बरसती है।”मुर्मू ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के द्वार पर जाति धर्म या छुआछूत नहीं होता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण भगवान जगन्नाथ को ‘जगत के नाथ’ भी कहा जाता है। मुर्मू ने झारखंड की राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि राज्य ने सामाजिक सद्भाव का एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है और आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखा है।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर कहा कि अब तक देशभर में 500 से अधिक जगन्नाथ मंदिर बनाए जा चुके हैं।श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परमार्थ केंद्र न्यास के प्रबंध न्यासी और उद्योगपति एस. के. बेहरा ने बताया कि प्रस्तावित आध्यात्मिक केंद्र ओडिशा के पुरी स्थित 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति होगा। इसे खरखाई नदी के किनारे 2.5 एकड़ भूमि पर लगभग 100 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना से झारखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और यह युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण व नैतिक विकास के केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा। राष्ट्रपति मुर्मू ने बाद में बारीदिहा स्थित मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों से बातचीत की और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया। पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाने के लिए परिसर में एक पौधा भी लगाया।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common