दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मांग की है कि दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष 21 दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं और दिल्ली सरकार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की सभी 14 रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दें। यह अजीब विडंबना है कि वही अरविंद केजरीवाल जिन्होंने 2011-12 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ सीएजी रिपोर्ट पर कार्रवाई और बिजली वितरण कंपनी की साझेदार निजी कंपनियों के खातों की जांच की मांग करके अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी, अब दो साल से अधिक समय से सीएजी रिपोर्ट सार्वजनिक करने से बच रहे हैं।इसके अलावा केजरीवाल पार्टी की सरकार पावर डिस्कॉम के निजी भागीदारों को बचाने में भी सक्रिय है। अरविंद केजरीवाल ने न केवल कॉमनवेल्थ गेम्स के खर्च पर सीएजी रिपोर्ट को उठाकर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की, बल्कि 6 फरवरी 2014 को मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल ने सीएजी रिपोर्ट के आधार पर अपनी पूर्ववर्ती श्रीमती शीला दीक्षित के खिलाफ एसीबी जांच के आदेश भी दिए। सीएजी एक स्वतंत्र संस्था है जिसका काम हर सार्वजनिक व्यय और काम की समीक्षा करना है और सीएजी की रिपोर्ट हर सरकार को जवाबदेह बनाती है और अदालत में स्वीकार्य होती है। 2017-18 और 2021-22 के बीच अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान शराब पर उत्पाद शुल्क में अनियमितता, प्रदूषण और अन्य वित्तीय मुद्दों को लेकर सीएजी की 14 बड़ी रिपोर्ट आईं, लेकिन आप सरकार ने उन्हें आज तक दबाए रखा है। भाजपा विधायक दल दो वर्षों तक इन रिपोर्टों को विधानसभा में पेश करने की मांग करता रहा, लेकिन जब अरविंद केजरीवाल ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो दिल्ली भाजपा के निर्देश पर विधायक दल के नेता श्री विजेंद्र गुप्ता व अन्य 6 विधायकों श्री अजय महावर, श्री ओमप्रकाश शर्मा, श्री मोहन सिंह बिष्ट, श्री अभय वर्मा, श्री जितेंद्र महाजन व श्री अनिल बाजपेयी ने 29 अक्टूबर 2024 को माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर सीएजी रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने व इसे सार्वजनिक करने की मांग की, जिस पर माननीय न्यायालय ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा, लेकिन सरकार ने कहा कि रिपोर्ट उपराज्यपाल के पास है और वे ही सक्षम अधिकारी हैं, तथा माननीय न्यायालय को गुमराह करके लंबी स्थगन लेने का प्रयास किया, लेकिन दिल्ली की जनता का सौभाग्य रहा कि सीएजी ने भी अपना हलफनामा माननीय न्यायालय में रख दिया, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई। हमें उम्मीद है कि 14 CAG रिपोर्ट दिल्ली की जनता के सामने पेश किए जाने के बाद एक-दो नहीं बल्कि 14 ऐसे मामले सामने आएंगे जिसके बाद सुश्री आतिशी मार्लेना सरकार अपनी पूर्ववर्ती अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ जांच की सिफारिश करने पर मजबूर होगी। हम विधानसभा अध्यक्ष से मांग करते हैं कि वे आगामी शनिवार 21 दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं और दिल्ली सरकार को निर्देश दें कि वह सभी 14 CAG रिपोर्ट को वहां रखे। विशेष सत्र में कोई अन्य एजेंडा नहीं होना चाहिए।Photo : Wikimedia