बीजिंग,चीन में नियुक्त भारतीय राजदूत विक्रम दोराईस्वामी स्थानीय अधिकारियों से बातचीत करने तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए किये गए इंतजाम की संयुक्त रूप से समीक्षा करने के लिए तिब्बत की यात्रा पर हैं।
मई में प्रभार संभालने के बाद तिब्बत की उनकी यह पहली यात्रा है। दूतावास के एक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार दोराईस्वामी और दूतावास के अधिकारी बृहस्पतिवार को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की अपनी पहली यात्रा पर ल्हासा पहुंचे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए स्थानीय सरकारी अधिकारियों द्वारा की गई व्यवस्था की संयुक्त रूप से समीक्षा करना है।
तीर्थयात्रियों के इस महीने के अंत में पहुंचने का कार्यक्रम है। दूतावास के पोस्ट के अनुसार राजदूत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से मुलाकात की जिन्होंने तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं और तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
बाद में वह पेंग द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल हुए। दोराईस्वामी ने पिछले महीने की शुरुआत में राजदूत का पद संभाला था। वह द्विपक्षीय मुद्दों पर चीनी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित की जाने वाली यह तीर्थयात्रा शुरू में 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण और बाद में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध के कारण रोक दी गई थी। पांच साल के अंतराल के बाद तिब्बत में मानसरोवर झील पर भारतीय तीर्थयात्रियों का पहला जत्था पहुंचने के बाद पिछले साल जून में यह फिर से शुरू हुई।
रूस के कजान में 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई बैठक के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध फिर से बहाल होने पर पिछले साल कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने की पहल की गई थी।
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