नयी दिल्ली, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं और दोनों देशों के संसदीय मैत्री समूह से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलेगी। बिरला ने ये टिप्पणियां संसद भवन में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सईदोव के साथ मुलाकात के दौरान की।
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बयान के अनुसार दोनों नेताओं के बीच भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों पर व्यापक चर्चा हुई जिसमें संसदीय सहयोग व्यापार एवं निवेश शिक्षा संस्कृति तथा क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के आपसी मुद्दों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।
भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की संसदीय व्यवस्था जीवंत है जो देश की जनता की आकांक्षाओं और विविधता को प्रभावी ढंग से प्रतिबिंबित करती है।
उन्होंने कहा कि 543 सदस्यीय लोकसभा देशभर के करोड़ों नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती है और भारत की बहुदलीय व्यवस्था विभिन्न विचारों तथा रचनात्मक बहस के लिए समान अवसर उपलब्ध कराती है।
संसद की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए बिरला ने सईदोव को बताया कि संसद के वर्ष में तीन सत्र आयोजित होते हैं और वर्तमान मानसून सत्र में राष्ट्रीय महत्व के अनेक विषयों पर सक्रियता से चर्चा हो रही है।
बिरला ने बुनियादी ढांचे के विकास डिजिटल नवाचार प्रौद्योगिकी संपर्क निवेश और व्यापार के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत के युवा वैश्विक स्तर पर लगातार नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे हैं तथा अग्रणी विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग का दायरा निरंतर बढ़ रहा है।
बिरला ने मार्च 2026 में गठित भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि यह पहल संसदीय संवाद को नई गति देगी और आर्थिक शैक्षिक सांस्कृतिक तथा जन-से-जन संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगी।
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