नयी दिल्ली, भारत को शोध और पेटेंट संरक्षण से लेकर व्यावसायीकरण तथा आर्थिक मूल्य सृजन तक की प्रक्रिया मजबूत करने की जरूरत है। केवल पेटेंट दाखिल करने से बाजार में सफलता वैश्विक प्रतिस्पर्धा या अर्थव्यवस्था पर प्रभाव सुनिश्चित नहीं होता है।
विशेषज्ञों ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि देश में शोध एवं विकास (आरएंडडी) को मजबूत करना जरूरी है क्योंकि इससे नयी बौद्धिक संपदा तैयार होती है।
विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के साचा वुंश-विंसेंट ने कहा ‘‘बौद्धिक संपदा को केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि उसका व्यावसायीकरण किया जाना चाहिए इसके लिए लाइसेंस देने और उसे बाजार तक पहुंचाने की जरूरत है।’’
उन्होंने कहा कि भारत को विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल जमीनी स्तर पर बड़े सहयोग और छात्रों के नवाचारों को अधिक समर्थन देने की आवश्यकता है। इसके अलावा शोध व्यवस्था को अधिक खुला बनाने अत्याधुनिक विज्ञान पर आधारित उद्यमों को विस्तार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और उच्च प्रौद्योगिकी वाले विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने की भी जरूरत है।
‘एडवांस्ड स्टडी इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया’ की शिवानी सिंह ने कहा कि पेटेंट दाखिल करने या उसका पंजीकरण कराने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसका व्यावसायीकरण हो गया है वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी है या उसका अर्थव्यवस्था पर कोई प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने कहा ‘‘भारत की नवाचार यात्रा के अगले चरण में शोध और नए विचारों के सृजन से लेकर बौद्धिक संपदा के संरक्षण उसे उपयोगी उत्पादों में बदलने और आर्थिक मूल्य पैदा करने तक की प्रक्रिया को मजबूत करना होगा।’’विशेषज्ञ आठ अक्टूबर को यहां आयोजित ओपी मंथन सत्र में अपने विचार रख रहे थे।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common