केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में, भारत ने आज नई दिल्ली में BIMSTEC के गृह मंत्रियों की पहली बैठक की मेज़बानी की। बैठक में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा, विश्वास और सहयोग को मज़बूत करने के लिए BIMSTEC सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया गया।अपने संबोधन में, केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि BIMSTEC के गृह मंत्रियों की पहली बैठक की मेज़बानी करना भारत के लिए बहुत गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि BIMSTEC क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के लिए एक ज़रूरी मंच बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ‘विश्वमित्र’ की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है और हमेशा शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहा है।अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अप्रैल, 2025 को बैंकॉक में छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान कहा था, “हमारे लिए, BIMSTEC सिर्फ़ एक क्षेत्रीय संगठन नहीं है। यह हमारे समावेशी विकास और सुरक्षा का एक मॉडल है।”
शाह ने कहा कि इस विज़न को आगे बढ़ाते हुए, गृह मंत्रियों के तौर पर आज हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने सहयोग को ऐसे व्यावहारिक तरीकों में बदलें जो हमारे नागरिकों की सुरक्षा और हमारी एजेंसियों की क्षमताओं को मज़बूत करें।केंद्रीय गृह मंत्री ने आतंकवाद के प्रति भारत की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (सख़्त रवैये) की नीति पर ज़ोर दिया और आतंकवाद, सीमा-पार संगठित अपराध, ड्रग तस्करी, मानव तस्करी और उभरते साइबर खतरों से निपटने में बेहतर सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने समय पर खुफिया जानकारी साझा करने, वित्तीय जांच, आपसी कानूनी सहायता और प्रत्यर्पण के महत्व पर ज़ोर दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अपराधियों और आतंकवादियों को सज़ा दिलाई जा सके। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारा साझा संकल्प यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि आतंकवादी नेटवर्क को इस क्षेत्र के किसी भी हिस्से में सुरक्षित ठिकाने न मिलें, वे सदस्य न बना सकें, ट्रेनिंग न दे सकें, फंड न जुटा सकें या पड़ोसी देशों के खिलाफ गतिविधियां न कर सकें। अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय कानूनों और लागू संधियों के अनुसार, आपसी कानूनी सहायता और प्रत्यर्पण में सहयोग अपराधियों को सजा दिलाने की हमारी कोशिशों को मजबूत कर सकता है।
गृह मंत्री ने सहयोग के पांच मुख्य क्षेत्रों के महत्व पर जोर दिया: ड्रग कंट्रोल, आतंकवाद-रोधी और कानूनी सहयोग, भगोड़े अपराधियों की वापसी, साइबर-सुरक्षा और साइबर अपराध की जांच, और संस्थागत सहयोग व क्षमता निर्माण। उन्होंने अवैध वित्तीय लेनदेन और टेरर फाइनेंसिंग से निपटने के लिए एक समन्वित क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों, खुफिया एजेंसियों और सीमा प्रबंधन एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया।अमित शाह ने कहा कि भारत का मानना है कि ड्रग्स की तस्करी असल में ‘मौत की तस्करी’ है। इसी भावना के साथ, उन्होंने दोहराया कि नशीले पदार्थों की तस्करी में कुछ भी ‘गोल्डन’ नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ड्रग्स का व्यापार नहीं है, बल्कि हमारे युवाओं, समाज, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इससे अकेले किसी एक देश के प्रयासों से नहीं निपटा जा सकता। हमें ‘पूरे क्षेत्र’ (Whole of Region) का दृष्टिकोण अपनाना होगा। शाह ने कहा कि ड्रग्स से होने वाली अवैध कमाई संगठित अपराध को वित्तीय ताकत देती है और इसका इस्तेमाल…आतंकवाद के लिए फंडिंग।
उन्होंने कहा कि प्रीकर्सर केमिकल (precursor chemicals) का गलत इस्तेमाल और डार्क वेब के ज़रिए किए जाने वाले लेन-देन इस चुनौती को और मुश्किल बना देते हैं।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि BIMSTEC क्षेत्र में आपदा प्रबंधन में सहयोग उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने याद दिलाया कि छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में “BIMSTEC आपदा प्रबंधन केंद्र” स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था। शाह ने खुशी ज़ाहिर की कि यह केंद्र गुजरात के जामनगर में स्थापित किया जाना है। यह पहल पूरे क्षेत्र में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ‘पहले प्रतिक्रिया देने वाले’ (first responder) के तौर पर भारत की बेहतरीन भूमिका को दिखाती है। उन्होंने सदस्य देशों से इस प्रस्तावित केंद्र को चालू करने में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।अमित शाह ने कहा कि एक सदस्य देश की सुरक्षा पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को मज़बूत करती है।
उन्होंने कहा कि भारत बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए सभी सदस्य देशों के साथ विश्वास, सम्मान और सहयोग बढ़ाने और इस बैठक से ठोस नतीजे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।भारत के केंद्रीय गृह मंत्री ने BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जबकि केंद्रीय गृह सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक का नेतृत्व किया। बैठक में BIMSTEC के सभी सदस्य देशों—बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड—के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद हुई BIMSTEC गृह मंत्रियों की पहली बैठक ने सुरक्षा क्षेत्र में BIMSTEC द्वारा की गई विभिन्न पहलों की समीक्षा करने और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने में क्षेत्रीय सहयोग को और मज़बूत करने के लिए भविष्य की कार्ययोजना बनाने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान किया।BIMSTEC सदस्य देशों के गृह मंत्रियों ने निम्नलिखित को मंज़ूरी दी:
1. मानव तस्करी के खिलाफ BIMSTEC कन्वेंशन, जिसका उद्देश्य मानव तस्करी को रोकने, इस अपराध को दंडनीय बनाने और मानव तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
2. नशीली दवाओं के नियंत्रण पर BIMSTEC कार्ययोजना, जिसका उद्देश्य नशीली दवाओं, साइकोट्रोपिक पदार्थों और प्रीकर्सर केमिकल की अवैध तस्करी से निपटना है।
3. मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग (आतंकवाद के लिए फंडिंग) से निपटने के लिए BIMSTEC देशों के बीच क्षमता निर्माण पर समझौता ज्ञापन (MoU)। इसमें विशेषज्ञों की ट्रेनिंग, बेहतरीन तरीकों का आदान-प्रदान और कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सहयोग की व्यवस्था है, जैसे कि फाइनेंशियल क्राइम, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस, जांच, संपत्ति की रिकवरी, मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के उपाय, आतंकवाद के लिए फंडिंग का मुकाबला करना और प्रसार के लिए फंडिंग (proliferation financing) का मुकाबला करना।
4. गैर-कानूनी फाइनेंशियल फ्लो (पैसे का अवैध लेन-देन) और उन्हें रोकने पर BIMSTEC का एक्शन प्लान। इसका मकसद BIMSTEC सदस्य देशों के बीच गैर-कानूनी फाइनेंशियल फ्लो के स्रोतों, जोखिमों और तरीकों की पहचान करना है।
5. बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तैयारी और तालमेल बढ़ाने का एक्शन प्लान। इसमें सदस्य देशों द्वारा क्षेत्रीय जोखिम योजना, संयुक्त अभ्यास, शुरुआती चेतावनी सिस्टम, आपदा मैपिंग, ट्रेनिंग सेंटर, जानकारी साझा करने, रिसर्च, तकनीकी इनोवेशन और सुनामी के जोखिम को कम करने जैसे क्षेत्रों में मिलकर प्रयास करने का प्रस्ताव है।BIMSTEC के गृह मंत्रियों की पहली बैठक में ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को भी अपनाया गया, जिसमें BIMSTEC के तहत सुरक्षा सहयोग का मार्गदर्शन करने वाले विभिन्न सिद्धांतों की रूपरेखा दी गई है। BIMSTEC के गृह मंत्रियों की पहली बैठक में अपनाए गए दिल्ली घोषणापत्र में, सदस्य देशों ने…उन्होंने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और विकास के लिए सहयोग को मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।
घोषणापत्र में सीमा-पार आतंकवाद, टेरर फ़ाइनेंसिंग (आतंकवाद के लिए धन जुटाना), कट्टरपंथ, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध से निपटने पर ज़ोर दिया गया। इसमें जानकारी साझा करने, आपसी कानूनी सहायता, प्रत्यर्पण, क्षमता निर्माण और मौजूदा समझौतों व कार्य योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने को प्राथमिकता दी गई। इसमें ऑनलाइन घोटालों में फंसी मानव तस्करी की शिकार महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर भी ज़ोर दिया गया। घोषणापत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मज़बूत करने में भारत के नेतृत्व की सराहना की गई।भारत ने पुलिस प्रशिक्षण, आतंकवाद-रोधी अभियानों और फ़ोरेंसिक जांच में अपनी विशेषज्ञता साझा करने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। बैठक में आपदा प्रबंधन में सहयोग पर भी ज़ोर दिया गया, जिसमें गुजरात के जामनगर में प्रस्तावित BIMSTEC आपदा प्रबंधन केंद्र भी शामिल है।
यह बैठक BIMSTEC क्षेत्र को सुरक्षित और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।’बे ऑफ़ बंगाल इनिशिएटिव फ़ॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (BIMSTEC) दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के उप-क्षेत्रों के बीच एक महत्वपूर्ण संस्थागत कड़ी के रूप में कार्य करता है, जो बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के बीच बहुआयामी सहयोग, सामूहिक सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देता है।2018 में आयोजित चौथे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान, सहयोग और समन्वय को मज़बूत करने के लिए BIMSTEC गृह मंत्रियों के स्तर पर बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान इस पहल को भारत का पूर्ण समर्थन दिया और BIMSTEC गृह मंत्रियों की पहली बैठक की मेज़बानी करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की।https://x.com/PTI_News/status/2110044971088871603/photo/1