भारत ने 20वीं EAS ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा पर ज़ोर दिया

बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, श्रीपाद येसो नाइक ने आज फिलीपींस के मनीला में आयोजित 20वीं ईस्ट एशिया समिट (EAS) ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बैठक को संबोधित करते हुए, श्री नाइक ने क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और एक सुरक्षित, मज़बूत, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य को मज़बूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया।भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ASEAN के साथ अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करते हुए, मंत्री ने ‘ऊर्जा सहयोग के लिए ASEAN कार्य योजना 2026–2030’ का स्वागत किया।

साथ ही, उन्होंने ‘ASEAN-भारत कार्य योजना 2026–2030’ के तहत सहयोग पर ज़ोर दिया, जिसमें ASEAN पावर ग्रिड, क्षेत्रीय बिजली ट्रांसमिशन, बहुपक्षीय बिजली व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा शामिल हैं। उन्होंने ग्रिड कनेक्टिविटी पर 400 पेशेवरों को प्रशिक्षण देकर ASEAN पावर ग्रिड पहल का समर्थन करने के लिए 2025 में 22वें ASEAN-भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणा को भी याद किया।नाइक ने बिजली सेक्टर में भारत की बड़ी प्रगति की ओर ध्यान दिलाया।

30 सितंबर, 2026 तक बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 558.8 GW तक पहुँच गई, जिसमें 308 GW क्षमता नॉन-फॉसिल (गैर-जीवाश्म) स्रोतों से थी, जो कुल क्षमता का 55% है। उन्होंने ‘पीएम सूर्य घर’ योजना के तहत हुई प्रगति का भी ज़िक्र किया; 29 सितंबर, 2026 तक लगभग 50.1 लाख (5.01 मिलियन) रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए, जिनसे 59.5 लाख (5.95 मिलियन) परिवारों को फ़ायदा हुआ।

उन्होंने बताया कि भारत ने जून 2025 में ही नॉन-फॉसिल स्रोतों से कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50% हासिल कर लिया था, जो 2030 के NDC लक्ष्य से पाँच साल पहले ही पूरा हो गया।क्षेत्रीय इंटरकनेक्शन के बारे में, नाइक ने कहा कि भारत और सिंगापुर 2,000 MW के प्रस्तावित क्रॉस-बॉर्डर पावर इंटरकनेक्शन के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। एक विकल्प पर विचार किया जा रहा है, जो लगभग 3,000 km लंबा ज़मीनी ट्रांसमिशन कॉरिडोर होगा।

यह कॉरिडोर भारत के इंफाल को म्यांमार, थाईलैंड और मलेशिया होते हुए सिंगापुर से जोड़ेगा। इस प्रस्तावित इंटरकनेक्शन से भरोसेमंद क्रॉस-बॉर्डर बिजली व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है, क्लीन एनर्जी इंटीग्रेशन में मदद मिल सकती है और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत हो सकती है।मंत्री ने EAS में शामिल देशों के साथ बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) को लागू करने, ग्रिड इंटीग्रेशन, ट्रांसमिशन प्लानिंग, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत का अनुभव साझा करने की इच्छा जताई। उन्होंने ASEAN सेंटर फॉर एनर्जी और NTPC, POWERGRID, CEA, NIWE, NISE और NPTI जैसे भारतीय संस्थानों के बीच बेहतर संस्थागत संबंध बनाने का भी आह्वान किया।नाइक ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व, आपातकालीन तैयारी, बिजली सिस्टम की मज़बूती, LNG और गैस सप्लाई की सुरक्षा, रिन्यूएबल एनर्जी की भविष्यवाणी (forecasting), बैटरी एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य उभरती ऊर्जा तकनीकों पर सहयोग के मौकों के बारे में भी बताया।

उन्होंने भाग लेने वाले देशों की प्राथमिकताओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए CCUS और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम पर ASEAN सहयोगियों के साथ ज्ञान के आदान-प्रदान और सहयोग में भारत की रुचि भी ज़ाहिर की।उन्होंने ASEAN पावर ग्रिड पर ‘एनहैंस्ड मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग’ को लागू करने और बहुपक्षीय बिजली व्यापार को मज़बूत करने के ASEAN के प्रयासों के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। https://x.com/shripadynaik/status/2108089964370256225/photo/1

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