भारत 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘भारत मंथन-2025: नक्सल मुक्त भारत – मोदी के नेतृत्व में लाल आतंक का अंत’ के समापन सत्र को संबोधित किया।

इस अवसर पर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई तब तक समाप्त नहीं होगी जब तक भारतीय समाज उन लोगों को नहीं समझ लेता जो नक्सलवाद को वैचारिक, कानूनी और वित्तीय समर्थन प्रदान करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमाओं की सुरक्षा हमेशा से हमारी विचारधारा का मूल अंग रही है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी पार्टी के मिशन के केंद्र में तीन प्रमुख उद्देश्य रहे हैं: देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के सभी पहलुओं का पुनरुत्थान। केंद्रीय गृह मंत्री ने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने 1960 के दशक से वामपंथी हिंसा के कारण अपने प्राणों की आहुति दी, अपने प्रियजनों को खोया और शारीरिक व मानसिक कष्ट सहे। उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों के सत्ता में आने तक पश्चिम बंगाल में नक्सलवाद फलता-फूलता रहा और सत्ता में आते ही नक्सलवाद वहाँ से गायब हो गया।

केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री ने कहा कि जहाँ पहले बिखरे हुए दृष्टिकोण से काम किया जाता था, वहीं प्रतिक्रियाएँ घटना-आधारित होती थीं और कोई स्थायी नीति नहीं थी। एक तरह से, कोई कह सकता है कि सरकार की प्रतिक्रिया की कमान नक्सलियों के हाथ में थी। शाह ने कहा कि 2014 के बाद सरकार के अभियानों और कार्यक्रमों का संचालन गृह मंत्रालय, भारत सरकार के पास है और यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है।

अमित शाह ने कहा कि बिखरे हुए दृष्टिकोण के बजाय, मोदी सरकार ने एकीकृत और निर्मम दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की नीति हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने वालों का लाल कालीन बिछाकर स्वागत करने की है, लेकिन अगर कोई निर्दोष आदिवासियों की हत्या के लिए हथियार उठाता है, तो सरकार का कर्तव्य निर्दोष आदिवासियों की रक्षा करना और सशस्त्र नक्सलियों का मुकाबला करना है।

अमित शाह ने कहा कि पहली बार भारत सरकार ने बिना किसी भ्रम के एक स्पष्ट नीति अपनाई। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को स्वतंत्रता दी गई और खुफिया जानकारी, सूचना साझाकरण और संचालन में समन्वय के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों के बीच एक व्यावहारिक सेतु का निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति पर कड़ा नियंत्रण लगाया गया। 2019 के बाद, हम उनकी 90 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति को रोकने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनआईए और ईडी ने नक्सलियों को वित्तपोषित करने वालों पर शिकंजा कसा है और हमने शहरी नक्सलियों के समर्थन, उनके कानूनी सहायता नेटवर्क और मीडिया की गढ़ी हुई बातों के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि हमने केंद्रीय समिति के सदस्यों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई की और 19 अगस्त से अब तक 18 से अधिक केंद्रीय समिति के सदस्यों को मार गिराया गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा शून्यता को भी पाटा गया है और ऑपरेशन ऑक्टोपस तथा ऑपरेशन डबल बुल जैसे लक्षित अभियान चलाए गए। उन्होंने कहा कि डीआरजी, एसटीएफ, सीआरपीएफ और कोबरा इकाइयों का संयुक्त प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। चारों अब एक साथ अभियान चलाते हैं और उनकी कमान श्रृंखला अब स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि एकीकृत प्रशिक्षण ने हमारी सफलता में बड़ा योगदान दिया है। इसके साथ ही, फोरेंसिक जाँच शुरू की गई, एक लोकेशन-ट्रैकिंग सिस्टम उपलब्ध कराया गया, राज्य पुलिस के साथ मोबाइल फोन की गतिविधियों को साझा किया गया, वैज्ञानिक कॉल-लॉग विश्लेषण सॉफ्टवेयर विकसित किया गया और छिपे हुए समर्थकों का पता लगाने के लिए सोशल मीडिया विश्लेषण का उपयोग किया गया। इससे न केवल नक्सल विरोधी अभियान में तेजी आई बल्कि यह अधिक सफल और परिणामोन्मुखी भी बना।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2019 के बाद राज्यों के क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया। एसआरई और एसआईएस योजनाओं के तहत लगभग ₹3,331 करोड़ जारी किए गए, जो 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसके माध्यम से, सुदृढ़ पुलिस थानों का विस्तार किया गया, जिन पर लगभग ₹1,741 करोड़ खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में, मोदी सरकार ने सुरक्षा शून्यता को दूर करने के लिए 336 नए सीएपीएफ शिविर स्थापित किए। परिणामस्वरूप, 2004-14 की अवधि की तुलना में, 2014-24 की अवधि में सुरक्षाकर्मियों की मृत्यु में 73 प्रतिशत और नागरिकों की मृत्यु में 74 प्रतिशत की कमी देखी गई। शाह ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ में विपक्षी सरकार होने के कारण सफलता मिलना मुश्किल था। हालाँकि, 2024 के बाद, हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद, एक साल में सबसे ज़्यादा 290 नक्सली मारे गए।

अमित शाह ने कहा कि जो लोग यह प्रचार करते हैं कि वामपंथी उग्रवाद का मूल कारण विकास का अभाव है, वे देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 60 करोड़ गरीबों के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं, लेकिन नक्सल प्रभावित इलाकों में इन योजनाओं को लोगों तक पहुँचने से कौन रोकता है? उन्होंने पूछा, अगर सुकमा या बीजापुर में स्कूल नहीं पहुँचे हैं, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? वामपंथी बहुल इलाकों में सड़कें क्यों नहीं बनीं? क्योंकि नक्सलियों ने ठेकेदारों को मार डाला। शाह ने पूछा कि क्यों नहीं उन्होंने कहा कि कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार ने एक सुनियोजित नीति के तहत काम किया। शाह ने कहा कि 2004-2014 के दौरान 7,300 हिंसक घटनाओं की तुलना में 2014-2024 में 1,800 हिंसक घटनाएं हुईं। सुरक्षाकर्मियों की मृत्यु में 65 प्रतिशत और नागरिकों की मृत्यु में 77 प्रतिशत की कमी आई। उन्होंने कहा कि अब देश का हर कानून वहां लागू हो रहा है। आज़ादी के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव हुए, जिसमें 99.8 प्रतिशत मतदान हुआ। शाह ने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की समस्या के समाधान की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं।

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