मतदाता सूची के ‘विशेष सारांश पुनरीक्षण’ की घोषणा

4 नवंबर 2026 को संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे एक पत्र में, आयोग ने निर्देश दिया कि ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 21 के तहत मौजूदा मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जाए।चुनाव आयोग (ECI) ने अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में मतदाता सूची के ‘विशेष सारांश पुनरीक्षण’ (Special Summary Revision) की घोषणा की है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में मतदाता सूचियों के ‘विशेष सारांश पुनरीक्षण’ (SSR) के लिए कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसमें 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि (qualifying date) माना गया है।इस कवायद का उद्देश्य पात्र मतदाताओं, विशेष रूप से युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों का पंजीकरण आसान बनाना है।

साथ ही, इसमें उन नागरिकों से भी अग्रिम आवेदन स्वीकार किए जाएंगे जो 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को मतदाता बनने के लिए पात्र हो जाएंगे।आयोग ने 29 सितंबर, 2026 को जारी अपने पिछले निर्देशों का हवाला दिया, जिसमें उन पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने की बात कही गई थी जो अब तक छूट गए थे; इनमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भी शामिल हैं।घोषित कार्यक्रम के अनुसार, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण (rationalisation) और पुनर्व्यवस्थापन 20 नवंबर, 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। एकीकृत मसौदा मतदाता सूची 30 नवंबर, 2026 को प्रकाशित की जाएगी।दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 30 नवंबर से 30 दिसंबर, 2026 तक खुली रहेगी।

आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा 16 जनवरी, 2027 तक कर दिया जाए, जबकि अंतिम मतदाता सूची 21 जनवरी, 2027 को प्रकाशित की जाएगी।इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान, अधिकारी उन नागरिकों से आवेदन प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे जो 1 अक्टूबर, 2026 को या उससे पहले पात्र हो गए थे, साथ ही उन संभावित मतदाताओं पर भी जो 1 जनवरी, 2027 को पात्र हो जाएंगे, और उन लोगों पर भी जो बाद की तीन अर्हक तिथियों—1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर, 2027—को पात्रता प्राप्त करेंगे।आयोग ने मतदान केंद्रों के युक्तिकरण के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि यह प्रक्रिया मतदान केंद्रों के स्थानों और मतदाता सूची के संबंधित हिस्सों के 100 प्रतिशत भौतिक सत्यापन (physical verification) के बाद ही पूरी की जानी चाहिए।निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को नए मतदान केंद्रों की आवश्यकता का आकलन करने का निर्देश दिया गया है।

साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता न हों, सिवाय उस स्थिति के जब आयोग से पूर्व अनुमति ली गई हो।भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने यह भी निर्देश दिया है कि मतदान केंद्रों की सीमाएं स्पष्ट रूप से निर्धारित होनी चाहिए और वे अन्य मतदान केंद्रों के क्षेत्रों के साथ ओवरलैप नहीं करनी चाहिए। जहाँ तक संभव हो, मतदाताओं को अपने निर्धारित मतदान केंद्र तक पहुँचने के लिए दो किलोमीटर से अधिक की दूरी तय न करनी पड़े और न ही किसी प्राकृतिक बाधा को पार करना पड़े। https://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/8/89/ECI_Logo.svg?utm_source=commons.wikimedia.org&utm_campaign=index&utm_content=original

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