मैं यथार्थवादी हूं, सफलता से प्रभावित नहीं होता : मनोज बाजपेयी

नयी दिल्ली, मनोरंजन उद्योग में अपने तीन दशक के लंबे करियर में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले अभिनेता मनोज बाजपेयी का कहना है कि वह अपनी पेशेवर उपलब्धियों या असफलताओं को खुद पर हावी नहीं होने देते हैं।

अपनी वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ के दूसरे सीजन के लिए प्रशंसा पाने वाले 52 वर्षीय अभिनेता ने कहा कि वह करियर विकल्प बनाने की कोशिश करते हैं, जो उन्हें और उनके दर्शकों को एक ‘अनूठा’ अनुभव प्रदान करते हैं।

बाजपेयी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘इंडस्ट्री में 26 साल हो गए हैं और मैं बहुत सारी भावनाओं, उत्साह, सफलता और असफलताओं से गुजरा हूं। यह सब बस मेरे जीवन का हिस्सा बन गया है। वे मेरे शिल्प या मुझे एक अभिनेता या व्यक्ति के रूप में परिभाषित नहीं करते हैं। मैं एक यथार्थवादी हूं और सफलता से प्रभावित या असफलताओं से निराश नहीं होता।’’

ऐमेजॉन प्राइम वीडियो के शो ‘‘द फैमिली मैन’’ का पहली बार 2019 में प्रीमियर हुआ और समीक्षकों द्वारा प्रशंसित अभिनेता के डिजिटल जगत में सफल प्रवेश को चिह्नित किया। बाजपेयी इससे पहले ‘‘सत्या’’, ‘‘शूल’’, ‘‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’’ फ्रेंचाइजी, ‘‘स्पेशल 26’’, ‘‘अलीगढ़’’ और ‘‘भोंसले’’ जैसी शानदार फिल्में दे चुके हैं।

फिल्म निर्माता जोड़ी राज निदिमोरु और कृष्णा डीके द्वारा बनाई गई एक्शन-ड्रामा सीरीज में एक अधेड़ उम्र के जासूसी एजेंट श्रीकांत तिवारी की भूमिका ने दर्शकों की अपेक्षाओं को बढ़ा दिया है, लेकिन अभिनेता ने कहा कि वह इससे दबाव महसूस नहीं करते हैं।

बाजपेयी ने कहा, ‘‘दर्शकों की उम्मीदों का स्वागत है, उन्हें मुझसे अच्छे काम की उम्मीद करनी चाहिए, जैसा मैं भी खुद से करता हूं। मैं सख्त अनुशासन रखने और हर बार काम करने के लिए बाहर निकलने पर अच्छा काम करने में विश्वास करता हूं। लेकिन मैं उम्मीदों से विवश महसूस नहीं करता।’’

अभिनेता को हाल में इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2021 (आईएफएफएम) द्वारा ‘‘द फैमिली मैन 2’’ सीरीज के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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