मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत-पोलैंड का संयुक्त बयान

22 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और पोलैंड ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करके ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई।डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनके साथ लगभग 100 प्रमुख व्यावसायिक अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। साथ ही, उन्होंने ‘भारत-पोलैंड कार्य योजना 2024–2028’ के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की। इस कार्य योजना को अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान अपनाया गया था, जब दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया गया था।

व्यापार और आर्थिक सहयोग चर्चाओं का एक प्रमुख हिस्सा रहे। दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के पूरा होने का स्वागत किया और व्यापार, निवेश तथा बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए इस पर जल्द हस्ताक्षर करने, इसे मंजूरी देने और लागू करने का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने ‘भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम’ का भी स्वागत किया और औद्योगिक मशीनरी, बुनियादी ढांचे, फार्मास्यूटिकल्स, खनन, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।दोनों नेता कृषि क्षेत्र में सहयोग और व्यापार को मजबूत करने के लिए, इस क्षेत्र से जुड़े द्विपक्षीय कार्य समूह की गतिविधियों को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए। उन्होंने मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन), छोटे और मध्यम उद्यमों को समर्थन, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार-आधारित आर्थिक विकास के महत्व पर भी जोर दिया।

दोनों पक्ष मिलकर शोध (रिसर्च) करने पर भी सहमत हुए।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ, स्टार्टअप पार्टनरशिप और रिसर्च संस्थानों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना।रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में, दोनों देश अपने रक्षा प्रतिष्ठानों और उद्योगों के बीच सहयोग को और गहरा करने पर सहमत हुए। नेताओं ने ‘डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग’ (रक्षा उद्योग संवाद) शुरू करने का प्रस्ताव रखा, ताकि संयुक्त विकास, सह-उत्पादन, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और औद्योगिक सहयोग के अवसरों की पहचान की जा सके। उन्होंने सितंबर 2026 में वारसॉ में आयोजित ‘डिफेंस जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ (रक्षा संयुक्त कार्य समूह) की आठवीं बैठक के नतीजों का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि गोपनीय सूचनाओं की आपसी सुरक्षा और आदान-प्रदान से जुड़ा समझौता जल्द ही हो जाएगा।संयुक्त बयान में अंतरिक्ष तकनीक, सेमीकंडक्टर विकास, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), बैटरी रीसाइक्लिंग, दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ मिनरल्स) की रिफाइनिंग और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर भी जोर दिया गया। दोनों देश भूविज्ञान और खनन के क्षेत्र में मजबूत सहयोग तलाशने पर सहमत हुए; इस संबंध में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर अभी बातचीत चल रही है।

कनेक्टिविटी के मोर्चे पर, भारत और पोलैंड सीधे हवाई संपर्क बढ़ाने, तथा शिपिंग, समुद्री सुरक्षा और बंदरगाह के बुनियादी ढांचे में सहयोग करने पर सहमत हुए। नेताओं ने कनेक्टिविटी को मजबूत करने और वैश्विक सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) के महत्व को भी रेखांकित किया। इसके अलावा, वे ध्रुवीय मामलों (पोलर अफेयर्स) में वैज्ञानिक सहयोग विकसित करने पर भी सहमत हुए।शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के तहत, नेताओं ने क्राको की जगिएलोनियन यूनिवर्सिटी में ‘इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस’ (ICCR) के ‘इंडियन स्टडीज चेयर’ की स्थापना का स्वागत किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिसमें छात्रों और फैकल्टी का आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और संस्थागत साझेदारी शामिल है। दोनों पक्ष संस्कृति, खेल, पर्यटन और युवाओं के आदान-प्रदान के क्षेत्र में भी सहयोग मजबूत करने पर सहमत हुए।संयुक्त बयान में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को याद किया गया, विशेष रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत द्वारा पोलिश महिलाओं और बच्चों को दी गई शरण का जिक्र किया गया। नेताओं ने ‘जाम साहेब मेमोरियल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम’ का स्वागत किया और 2022 में ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत यूक्रेन से 2,000 से अधिक भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने में पोलैंड द्वारा दी गई मदद को सराहा।बहुपक्षीय सहयोग के संदर्भ में, पोलैंड ने एक बार फिर दोहराया कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और विस्तार के बाद भारत की सदस्यता का समर्थन करता है। साथ ही, पोलैंड ने 2028-2029 के लिए सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी समर्थन किया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में संरचनात्मक सुधारों का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा परिषद का स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार करना शामिल है।

यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करते हुए, मोदी और टस्क ने इसके मानवीय परिणामों पर चिंता जताई। उन्होंने एक ऐसी व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप हो—जिसमें संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना शामिल है। उन्होंने वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर युद्ध के प्रतिकूल प्रभावों को भी रेखांकित किया, विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के लिए।दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों—जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है—की कड़ी निंदा की। उन्होंने विशेष रूप से 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की। उन्होंने आतंकवादी संगठनों, उनके वित्तपोषण नेटवर्क और उन्हें सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन’ (Comprehensive Convention on International Terrorism) को जल्द अपनाने का समर्थन किया।

दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए आतंकवाद-रोधी मामलों पर द्विपक्षीय बातचीत शुरू करने पर भी सहमत हुए।नेताओं ने एक स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के सम्मान और नौवहन की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने पोलैंड को ‘इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव’ (IPOI) में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत और ‘विसेग्राद समूह’ (जिसमें पोलैंड, हंगरी, चेक गणराज्य और स्लोवाकिया शामिल हैं) के बीच विदेश मंत्रियों की पहली बैठक का स्वागत किया और ‘V4+भारत’ प्रारूप के माध्यम से आपसी जुड़ाव को मजबूत करने पर सहमति जताई।जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के मुद्दे पर, भारत ने पोलैंड द्वारा ‘कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ (CDRI) में शामिल होने की घोषणा का स्वागत किया। दोनों देश आपदा तैयारियों, स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ तकनीकों और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर सहमत हुए। भारत ने पोलैंड को ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन) और ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस’ (वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन) में शामिल होने का भी निमंत्रण दिया।दोनों प्रधानमंत्रियों ने नियमित उच्च-स्तरीय संवाद, मजबूत संस्थागत तंत्र और आर्थिक व रणनीतिक सहयोग के विस्तार के माध्यम से ‘भारत-पोलैंड कार्य योजना (2024-2028)’ को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री टस्क ने प्रधानमंत्री मोदी को पोलैंड आने का निमंत्रण भी दिया।https://x.com/MEAIndia/status/2113192703873921374/photo/4

%d bloggers like this: