मोदी के नेतृत्व के दौरान भारत को प्रतिबंधों की धमकी उल्टी पड़ेगी: पुतिन

सेंट पीटर्सबर्ग,  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के दौरान “प्रतिबंधों की धमकियों” से भारत की संप्रभुता को कमजोर करने की कोई भी कोशिश “तुरंत उल्टी पड़ेगी”। पुतिन ने पीटीआई समेत दुनिया की बड़ी समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत के दौरान उनकी टिप्पणियों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही।

            पुतिन ने कहा  “भारत हमेशा एक संप्रभु देश की तरह काम करता है  और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में  प्रतिबंधों की कोई भी संभावित धमकी तुरंत उल्टी पड़ेगी।”रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वह लंबे समय से प्रधानमंत्री मोदी के साथ करीबी बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने उस समय को भी याद किया जब मोदी के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।

            उन्होंने कहा  “मुझे पता है कि प्रधानमंत्री मोदी इसे कभी नहीं भूलेंगे। अब जब वह प्रधानमंत्री हैं  तो सभी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं  और जहां तक ​​मैं समझता हूं  अमेरिका और भारत के बीच रिश्ते कामयाबी के साथ बढ़ रहे हैं।”

             यह पूछे जाने पर कि अगर भारत सुखोई-57 विमान या एस-500 वायु रक्षा मंच जैसी रूसी रक्षा प्रणालियां खरीदता है  तो क्या उसे अमेरिकी प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है  पुतिन ने कहा  “भारत एक संप्रभु देश है  और वह उन उत्पादों को चुनने के लिए स्वतंत्र है जिन्हें वह अपने लिए सबसे आधुनिक और सबसे उपयुक्त मानता है  तथा जो स्पष्ट रूप से सर्वोत्तम मूल्य प्रदान करते हैं। चाहे लोग कुछ भी कहें  भारत हमेशा इसी तरह से कार्य करता आया है।”उन्होंने कहा  “भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर काम करता है।’ पुतिन ने कहा कि भारत के साथ रूस का सहयोग  दूसरे सभी साझेदारों की तरह  राजनीतिक माहौल पर निर्भर नहीं करता।

            उन्होंने कहा  “हम पर हुक्म नहीं चलाया जा सकता… कोई हमें नहीं चला सकता  और कोई ऐसा करने की कोशिश भी नहीं करेगा। हम हमेशा वही करेंगे जो हमें सही लगेगा  और साझेदारों  खासकर भारत जैसे साझेदार देशों को दी गई प्रतिबद्धता पर हमेशा कायम रहेंगे।”

             भारत के साथ रूस के पुराने रिश्तों  खासकर रक्षा क्षेत्र में संबंधों की बात करते हुए पुतिन ने कहा  “भारतीय दोस्तों के साथ हमारे रिश्ते खास हैं  जिसके लिए आपसी भरोसा एक वजह है। हम सिर्फ व्यापार पर ही ध्यान नहीं देते। सिर्फ खरीदने और बेचने पर ही नहीं  हम संयुक्त अनुसंधान और विकास पर भी ध्यान दे रहे हैं।”

            पुतिन ने बताया कि कैसे दोनों देशों के विशेषज्ञ मध्यम श्रेणी की मिसाइल ब्रह्मोस के डिजाइन पर काम कर रहे हैं।

            पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू सुखोई-57 के बारे में पुतिन ने कहा कि रूस ने पहले भारत के साथ संयुक्त विकास कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा था  लेकिन बाद में योजना फलीभूत नहीं होने पर उसने अकेले इस परियोजना को आगे बढ़ाया।

            पुतिन ने कहा  “सुखोई-57 एक बहुत अच्छा विमान है  शायद सबसे आधुनिक  अभी तक दुनिया का सबसे अद्यतन विमान है। हमने पेशकश की थी कि हमें यह साथ मिलकर करना चाहिए। खैर  यह बात नहीं बनी  लेकिन हमने इसे अपने दम पर किया  और हम सुखोई-57 बेचने के लिए तैयार हैं।”

            रूस दशकों से भारत का मुख्य रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है। हालांकि  यूक्रेन में युद्ध की वजह से आपूर्ति शृंखला में लगातार रुकावट और आपूर्ति में देरी ने नयी दिल्ली को अपनी सैन्य खरीद की रणनीति में तेजी से बदलाव करने पर मजबूर कर दिया। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए वर्षों के प्रयास के बाद  भारत ने अपनी महत्वाकांक्षी आधुनिक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एएमसीए) परियोजना शुरू की है  जिसे देश का सबसे बड़ा स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रम माना जाता है।

क्रडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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