जिनेवा, वैश्विक एयरलाइंस निकाय आईएटीए के प्रमुख विली वॉल्श ने कहा कि राजनीतिक कारणों से हवाई क्षेत्र को बंद किया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह सभी विमानन कंपनियों के लिए खुला होना चाहिए। वॉल्श ने यह टिप्पणी भारत और पाकिस्तान द्वारा एक-दूसरे की उड़ानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र बंद करने के संबंध में पूछे गए एक सवाल पर की। उन्होंने पीटीआई-भाषा के एक सवाल पर कहा हम देख रहे हैं कि राजनीतिक कारणों से हवाई क्षेत्र बंद किए जा रहे हैं और स्पष्ट रूप से ऐसा होना हमारे लिए अस्वीकार्य है।
हालांकि आईएटीए के महानिदेशक ने अपने जवाब में किसी भी देश का जिक्र नहीं किया। दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में भी वायु क्षेत्र प्रतिबंध लागू हैं।
भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद 30 अप्रैल से पाकिस्तान की एयरलाइंस एवं परिचालकों द्वारा संचालित स्वामित्व वाली या पट्टे पर ली गई उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। इसके बाद से ये प्रतिबंध बढ़ाए जाते रहे हैं। पाकिस्तान ने भी भारतीय विमान कंपनियों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर रखा है।
वॉल्श ने उम्मीद जताई कि प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र उड़ानों के संचालन के लिए दोबारा खोले जाएंगे और एयरलाइंस उनका इस्तेमाल कर सकेंगी। वॉल्श ने कहा कि अगले साल एयरलाइंस प्रति यात्री औसतन सिर्फ 7.90 अमेरिकी डॉलर का मुनाफा कमाएंगी जबकि एप्पल सिर्फ एक आईफोन कवर बेचकर इससे ज्यादा कमाई कर लेगी। यह उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग स्तर पर एयरलाइन कंपनियों का मुनाफा अब भी बेहद मामूली है।
उन्होंने आगे कहा एयरलाइंस लोगों और अर्थव्यवस्थाओं को जोड़कर अपार मूल्य बनाती हैं। वे उस मूल्य शृंखला के केंद्र में हैं जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग चार प्रतिशत को आधार देती है और 8.7 करोड़ नौकरियों
को सहारा देती है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद एक यात्री पर एयरलाइंस को औसतन 7.90 डॉलर मिलेंगे जबकि उससे ज्यादा एप्पल सिर्फ एक आईफोन कवर बेचकर कमा लेगी।
वैश्विक एयरलाइन उद्योग हाल के वर्षों में अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है जिनमें आपूर्ति शृंखला की समस्याएं विमान आपूर्ति में देरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं शामिल हैं।
वॉल्श ने यह भी कहा कि एयरलाइन उद्योग को आने वाले आठ वर्षों तक आपूर्ति शृंखला की परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं क्योंकि विमान आपूर्ति में पहले ही कम से कम 5 300 विमानों की कमी है और एयरलाइंस की लागत भी बढ़ रही है। वॉल्श पहले भी विमान इंजन निर्माताओं के भारी मुनाफे और एयरलाइंस के कम मार्जिन पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस आपूर्ति शृंखला से जुड़ी समस्याओं पर कानूनी विकल्पों का भी मूल्यांकन कर रही हैं।
आपूर्ति शृंखला की स्थिति कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि अगर कोई एयरलाइन आज विमान का ऑर्डर दे तो उसे विमान मिलने में करीब 6.8 साल लगेंगे और कुल बकाया ऑर्डर 17 000 से अधिक है।
वर्ष 2025 के अंत में नए विमानों की आपूर्ति में थोड़ा सुधार शुरू हुआ है और 2026 में उत्पादन तेज होने की उम्मीद है लेकिन मांग अब भी विमानों और इंजनों की उपलब्धता से कहीं अधिक है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common