भुवनेश्वर, ओडिशा के जाजपुर जिले स्थित ललितगिरि में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की एक दुर्लभ बौद्ध धरोहर को संग्रहालय से बाहर निकालकर सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया ताकि देशभर से आए भिक्षुओं विद्वानों और श्रद्धालुओं को इसके दर्शन का अवसर मिल सके।
एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह अवसर 16 जनवरी को ललितगिरि में आयोजित दूसरे गुरु पद्मसंभव समारोह का था। इस दौरान पवित्र परिसर में वज्रयान बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले बौद्ध गुरु पद्मसंभव के सम्मान में अनुष्ठान प्रार्थनाएं और ध्यान सत्र आयोजित किए गए। समारोह में करुणा सजगता और आत्मबोध से जुड़े उनके उपदेशों पर भी चिंतन किया गया।
राज्य सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की पहचान की गई इस दुर्लभ बौद्ध धरोहर को 16 जनवरी को एएसआई ललितगिरि संग्रहालय के संरक्षित कक्ष से विधिवत बाहर लाकर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा गया। बयान के अनुसार आमतौर पर कड़े संरक्षण प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित रखी जाने वाली इस धरोहर को धार्मिक अनुष्ठान के हिस्से के रूप में आम जनता के लिए सुलभ कराया गया जिससे श्रद्धालुओं को श्रद्धा के साथ नमन करने का दुर्लभ अवसर मिला।
ओडिया भाषा साहित्य एवं संस्कृति विभाग के मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि इस आयोजन ने वैश्विक बौद्ध मानचित्र पर ललितगिरि के महत्व को पुनः रेखांकित किया और ओडिशा को प्राचीन बौद्ध सभ्यता विरासत और जीवंत परंपराओं के संरक्षक के रूप में और सुदृढ़ किया।
उन्होंने बताया कि पवित्र धरोहर का सार्वजनिक प्रदर्शन एएसआई की पहल पर पर्यटन विभाग तथा ओडिया भाषा साहित्य एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से किया गया। यह पहल ओडिशा की समृद्ध बौद्ध विरासत के संरक्षण संवर्धन और सम्मानजनक प्रस्तुति के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common