वाम श्रमिक संगठनों, किसान संगठनों ने एमएसपी, 200 दिन रोजगार गारंटी की मांग को लेकर रैलियां निकालीं

कोलकाता, पश्चिम बंगाल में वामपंथी श्रमिक संगठनों और किसान संगठनों ने सोमवार को कई जिला मुख्यालयों पर सविनय अवज्ञा रैलियां निकालीं। इस दौरान उन्होंने कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने और ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 200 दिन के काम समेत कई मांगें उठाईं।

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) और वाम संबद्ध अन्य मजदूर संगठनों तथा किसान संगठनों के सदस्यों ने बांकुड़ा और बर्धमान समेत कई जिलों में जिलाधिकारियों के कार्यालयों तक रैलियां निकालीं।

प्रदर्शनकारियों ने देशभर में विभिन्न कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने की मांग की। उन्होंने जी-राम-जी रोजगार गारंटी योजना की जगह मनरेगा को बहाल करने और हर व्यक्ति को सालाना 200 दिन का रोजगार देने की भी मांग की। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाई गई विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) की गारंटी (वीबी- जी राम जी) योजना के तहत प्रत्येक व्यक्ति को हर साल 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान है।

मजदूर संगठनों और कृषि श्रमिक संगठनों ने फेरीवालों और झुग्गी-बस्ती में रहने वाले लोगों को बेदखल किए जाने पर रोक लगाने की भी मांग की। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए उचित पुनर्वास नीति लागू करने की मांग भी की। उन्होंने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह लाए गए चार श्रम संहिताओं को भी रद्द करने की मांग की।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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