कोच्चि, केंद्र सरकार ने केरल उच्च न्यायालय को बताया कि पिछले साल जुलाई में वायनाड में हुए भूस्खलन से प्रभावित लोगों के ऋण माफ नहीं किए जाएंगे इसके बजाय उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित आरबीआई के मास्टर निर्देशों के अनुसार पुनर्निर्धारित या पुनर्गठित किया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने पूछा था कि क्या प्रभावित व्यक्तियों के ऋण माफ किए जा सकते हैं। इस सवाल के जवाब में दायर हलफनामे में केंद्र सरकार ने यह बात कही।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने हलफनामे में कहा कि पिछले साल 19 अगस्त को केरल की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की एक विशेष बैठक हुई थी और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की उपस्थिति में इस बैठक में प्राकृतिक आपदाओं को लेकर आरबीआई के मास्टर निर्देशों के तहत निर्धारित राहत उपायों को लागू करने का फैसला किया गया।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के मास्टर निर्देशों में प्राकृतिक आपदा की स्थिति में अपनाए जाने वाले वित्तीय राहत उपायों में मौजूदा ऋणों का पुनर्गठन या पुनर्निर्धारण शामिल है। इसके लिए एक वर्ष की ऋण स्थगन अवधि होती है और उसके बाद नए ऋणों का प्रावधान किया जाता है।
यह दलील वायनाड भूस्खलन के मद्देनजर न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान वाली एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई जिसका उद्देश्य केरल में आपदा रोकथाम उपायों में सुधार करना है।
पिछले साल 30 जुलाई को मुंदक्कई और चूरलमाला क्षेत्रों में एक बड़ा भूस्खलन हुआ जिससे दोनों क्षेत्र लगभग पूरी तरह से तबाह हो गए। इस आपदा में सैकड़ों लोग घायल हुए 200 से अधिक लोगों की जान चली गई और 32 लोग लापता हो गए थे।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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