विजय ने भ्रष्टाचार पर द्रमुक को घेरा, हंगामे के बाद विपक्षी दल का विधानसभा से बहिर्गमन

चेन्नई, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ सी. विजय ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर तीखा हमला बोलते हुए उसके शासनकाल में ‘‘गंभीर और संगठित भ्रष्टाचार’’ का आरोप लगाया। इसके विरोध में मुख्य विपक्षी दल के सदस्य हंगामा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने आ गए और बाद में बहिर्गमन किया। विजय ने कुछ दिन पहले मुख्य विपक्षी दल से किसी बहाने “भागने” के बजाय सदन में बने रहने का आग्रह किया था। उन्होंने “पार्टी के लिए चंदे” की कथित वसूली को लेकर द्रमुक के शीर्ष नेतृत्व पर सोमवार को निशाना साधा। द्रमुक ने मुख्यमंत्री पर कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बोलने के बजाय ‘‘ध्यान भटकाने वाली रणनीति’’ अपनाने का आरोप लगाया।

विजय ने गृह विभाग की अनुदान मांगों पर विधानसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए द्रमुक पर निशाना साधा। वह गृह मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे हैं। इस दौरान मंत्रिमंडल के सहयोगियों और सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) विधायकों ने मेज थपथपाकर उनका समर्थन किया। मुख्यमंत्री ने 1970 के दशक के एक मामले समेत द्रमुक शासन के दौरान “पार्टी के लिए चंदे” की कथित वसूली और “वैज्ञानिक भ्रष्टाचार” के उदाहरण गिनाए। सदन से बहिर्गमन के बाद नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने संवाददाताओं से बातचीत में विजय पर ध्यान भटकाने का आरोप लगाया और दावा किया कि मुख्यमंत्री ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर पूछे गए सीधे सवालों का जवाब नहीं दिया। द्रमुक नेता ने विजय पर राज्य में खनन ठेकों पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए ‘‘अपने सहयोगियों द्वारा चलाए जा रहे एक गिरोह को संरक्षण’’ देने का आरोप लगाया।

उदयनिधि ने मुख्यमंत्री के विधानसभा में दिए भाषण को ‘‘रटी-रटाई फिल्मी पटकथा’’ करार दिया। इससे पहले विजय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दस्तावेजों का हवाला देते हुए पूर्ववर्ती द्रमुक शासन के दौरान नगर प्रशासन विभाग और राज्य संचालित शराब कंपनी टीएएसएमएसी में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का उल्लेख किया। विजय ने केंद्र द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसी के दस्तावेजों में पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि के नाम कथित तौर पर ‘पार्टी के लिए जुटाई गई’ रकम के ‘‘लाभार्थियों’’ के रूप में दर्ज हैं।

मुख्यमंत्री ने ईडी के दस्तावेजों के हवाले से कहा ‘‘नगर प्रशासन विभाग के ठेकेदारों से पार्टी के लिए चंदे के रूप में रिश्वत ली गई थी।’’ एजेंसी का आरोप है कि ऐसे ठेकों में पार्टी के लिए 7.5 से 10 फीसदी राशि रिश्वत के रूप में वसूली जाती थी और यह तत्कालीन सत्ताधारी दल के फायदे के लिए एकत्र की जाती थी। मुख्यमंत्री ने टीएएसएमएसी में कथित भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व आबकारी मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक का भी नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया ‘‘बार मालिकों से पार्टी के लिए चंदा वसूला गया। इसके अलावा 2021 से 2025 तक ग्राहकों से 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक की अवैध वसूली संगठित तरीके से की गई।

धांधली भी बखूबी की गई और यह ‘‘वैज्ञानिक भ्रष्टाचार’’ था।’’ विजय ने केंद्रीय एजेंसी के दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा “खोटी नीयत यह द्रमुक की कितनी बड़ी उपलब्धि है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि ईडी ने द्रमुक शासन के दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े अपने दस्तावेजों में धांधली धोखाधड़ी हेरफेर सत्ता के दुरुपयोग और संगठित अपराध गिरोह जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है जो उनकी कथित “खोटी नीयत” को दर्शाते हैं। द्रमुक को चुनौती देते हुए उन्होंने पूछा “क्या यह सबूत काफी है ” इन आरोपों के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और मुख्य विपक्षी दल ने मुख्यमंत्री के बयान का कड़ा विरोध किया।जब मुख्यमंत्री आरोपों की सूची पढ़ रहे थे तभी नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में द्रमुक विधायक विरोध में खड़े हो गए।

उन्होंने नारेबाजी की और विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने आ गए। कुछ विधायक फर्श पर बैठ गए जबकि कुछ ने विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर के आसन को घेर लिया और नेता प्रतिपक्ष को जवाब देने का अवसर देने की मांग की।विधानसभा अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि उन्हें अवसर दिया जाएगा। उन्होंने विधायकों से अपनी सीट पर लौटने का अनुरोध करते हुए सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। इसके बाद द्रमुक विधायकों ने सदन से बहिर्गमन किया। अपना हमला जारी रखते हुए विजय ने कहा कि जब भी सत्तारूढ़ दल भ्रष्टाचार के आरोप लगाता है तो मुख्य विपक्षी दल के विधायक सबूत मांगते हैं लेकिन वे कभी यह नहीं कहते कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने कहा “केवल भ्रष्टाचार में शामिल लोग ही सबूत मांगते हैं।

जो लोग ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होते वे आरोपों की परवाह नहीं करते।” विजय ने शुरुआत में 1970 के दशक की सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एम. करुणानिधि नीत तत्कालीन द्रमुक सरकार के दौरान ‘‘निविदाओं में 2.5 प्रतिशत भ्रष्टाचार’’ के आरोप लगाए। उन्होंने टीएएसएमएसी में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में ईडी द्वारा ‘करूर गिरोह’ का संदर्भ देते हुए कहा कि अवैध गतिविधियां भी संगठित तरीके से की गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि द्रमुक शासन के दौरान “यह वैज्ञानिक तरीके से किया गया भ्रष्टाचार था।” करूर तमिलनाडु के पश्चिमी कोंगु क्षेत्र का हिस्सा है और यह सेंथिल बालाजी का गृह क्षेत्र है।

विजय ने कहा कि जब केवल दो विभागों से जुड़ी फाइलों की जांच में इतना कुछ सामने आ रहा है तो और अधिक दस्तावेजों की जांच करने पर क्या सामने आएगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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