विदेश मंत्री एस. जयशंकर भूटान के पारो पहुंचे और द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भूटान के विदेश मंत्री डी. एन. ढुंगेल के साथ बातचीत की। दोनों मंत्रियों ने बुमथांग में अपनी बैठक के दौरान भारत और भूटान के बीच व्यापक साझेदारी की समीक्षा की। उनकी बातचीत विकास सहयोग, ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर केंद्रित रही।जयशंकर ने कहा कि बातचीत से दोनों देशों के बीच संबंधों में मौजूद भरोसे, सद्भावना और गर्मजोशी का पता चलता है।
दोनों मंत्रियों ने मिलकर उत्तरी भूटान के गासा में 500-किलोवाट वाले लुनाना हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। जयशंकर ने इस प्रोजेक्ट को भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग में एक अहम पड़ाव बताया; इस सहयोग की शुरुआत 1967 में थिम्पू में भूटान के पहले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट, जुंगशिना से हुई थी। लुनाना प्रोजेक्ट से भूटान की उन बस्तियों में बिजली पहुंचाने में मदद मिलेगी जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है।उन्होंने मोंगगर में 65 बिस्तरों वाले ग्यालत्सुएन जेटसुन पेमा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का भी उद्घाटन किया।
उम्मीद है कि यह अत्याधुनिक अस्पताल पूर्वी भूटान में मां और बच्चे की खास स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाएगा।जयशंकर और ढुंग्येल ने समद्रुप जोंगखर में 80 मीटर लंबे जगनाथन ब्रिज का भी उद्घाटन किया। भारत-भूटान दोस्ती पहल के तहत प्रोजेक्ट दंतक द्वारा बनाया गया यह पुल पूर्वी भूटान में त्राशीगांग और समद्रुप जोंगखर के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा।
बुमथांग में नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर के दौरे के दौरान, जयशंकर ने भूटान के डेयरी मवेशी प्रजनन कार्यक्रम के लिए भारत से 43 शुद्ध नस्ल की जर्सी गायें सौंपीं। इस पहल का मकसद दूध उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय किसानों की मदद करना है। उम्मीद है कि सेंटर के प्रजनन कार्यक्रम से लगभग 40,000 किसानों को फायदा होगा।
जयशंकर ने बुमथांग में ऐतिहासिक वांगडुएछोलिंग पैलेस और म्यूज़ियम का भी दौरा किया। शाही निवास और दरबार रहे इस स्थान में भूटान के इतिहास, कला, शिल्प और वास्तुकला की झलक मिलती है।बाद में उन्होंने पवित्र कुर्जे लखांग में भारत और भूटान के लोगों की भलाई और दोनों देशों के बीच संबंधों के लगातार मजबूत होने के लिए प्रार्थना की।https://x.com/DrSJaishankar/status/2100208226319118595/photo/1