विपक्ष शासित राज्यों ने केंद्र के जीएसटी सुधार से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई करने को कहा

             नयी दिल्ली  29 अगस्त (भाषा) विपक्ष शासित राज्यों ने कहा कि केंद्र के जीएसटी दर में बदलाव के प्रस्ताव से लगभग 1.5 करोड़ रुपये से दो लाख करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान हो सकता है।

             इन राज्यों ने केंद्र से खुद को होने वाले नुकसान की भरपाई करने की मांग की। आठ राज्यों – हिमाचल प्रदेश  झारखंड  कर्नाटक  केरल  पंजाब  तमिलनाडु  तेलंगाना और पश्चिम बंगाल – के वित्त मंत्रियों ने तीन-चार सितंबर को जीएसटी परिषद की होने वाली अगली बैठक में अपना प्रस्ताव पेश करने का फैसला किया।

             दरों को युक्तिसंगत बनाने और राजस्व तटस्थता को संतुलित करने के उनके प्रस्ताव में मौजूदा कर भार को बनाए रखने के लिए प्रस्तावित 40 प्रतिशत दर के अलावा अहितकर और विलासिता की वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया है।

             विपक्ष शासित राज्यों ने मांग की कि इस शुल्क से मिलने वाली आय राज्यों के बीच वितरित की जानी चाहिए।  इन आठ राज्यों की बैठक के बाद कर्नाटक के वित्त मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक राज्य को अपने मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व में 15-20 प्रतिशत की कमी आने की आशंका है।

             बायरे गौड़ा ने कहा    जीएसटी राजस्व में 20 प्रतिशत की कमी देश भर की राज्य सरकारों के राजकोषीय ढांचे को गंभीर रूप से अस्थिर कर देगी। 

             उन्होंने कहा कि राज्यों को राजस्व स्थिर होने तक पांच वर्षों के लिए क्षतिपूर्ति दी जानी चाहिए।

             मंत्री ने कहा कि जब जीएसटी लागू किया गया था  तब राजस्व तटस्थ दर (आरएनआर) 14.4 प्रतिशत थी। बाद में कर दरों को युक्तिसंगत बनाने के बाद कराधान की शुद्ध दर घटकर 11 प्रतिशत हो गई।

             केंद्र के जीएसटी दरों को कम करने और स्लैब में कटौती करने के वर्तमान प्रस्ताव से कराधान की शुद्ध दर घटकर 10 प्रतिशत हो जाएगी। बायरे गौड़ा ने कहा    राज्यों के राजस्व हितों की रक्षा की जानी चाहिए। अगर राज्य सरकार के राजस्व को गंभीर नुकसान होता है  तो लोग प्रभावित होंगे  विकास कार्य प्रभावित होंगे और अपर्याप्त राजस्व राज्य की स्वायत्तता को भी नुकसान पहुंचाएगा। 

             केंद्र ने प्रस्ताव दिया है कि जीएसटी को पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत दर वाली दो स्तरीय कर संरचना बनाया जाए। इसके अलावा अहितकर और विलासिता वाली कुछ चुनिंदा वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की दर प्रस्तावित की गई है।

             हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा    हम दरों को युक्तिसंगत बनाने के प्रस्ताव से सहमत हैं  लेकिन हमें भी मुआवजा मिलना चाहिए।   पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी मांग की कि मुनाफाखोरी का पता लगाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित किया जाए ताकि दरों को युक्तिसंगत बनाने का लाभ आम आदमी तक पहुंच सके। इन राज्यों ने मांग की कि राजस्व संरक्षण की गणना के लिए आधार वर्ष 2024-25 तय किया जाए।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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